कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने और शांति वार्ता को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से एक नया कूटनीतिक प्रयास शुरू हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता प्रक्रिया को गति देने मास्को पहुंचे हैं। हालांकि, एक तरफ जहां शांति स्थापना की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर रूसी सेना द्वारा रातभर किए गए हवाई हमलों में यूक्रेन में चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
जेलेंस्की ने अमेरिकी दूतों की यात्रा के दौरान हमले रोकने की अपील की
शांति वार्ताओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बड़ा बयान दिया है:
एकतरफा हमले रोकने का फैसला: जेलेंस्की ने घोषणा की कि अमेरिकी दूतों की मास्को यात्रा के दौरान यूक्रेन की ओर से कोई हवाई हमला नहीं किया जाएगा।
रूस से अपील: उन्होंने रूस से भी इसी तरह का युद्धविराम अपनाने का आग्रह किया ताकि कूटनीतिक वार्ताओं और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि अमेरिकी मध्यस्थों की सुरक्षित यात्रा के लिए वायु क्षेत्र के प्रबंधन को सुचारू रखा जाएगा।
रूस का भीषण हवाई हमला: औद्योगिक इकाइयों और आवासीय क्षेत्रों को नुकसान
यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, रूस ने रोस्तोव और वोरोनेझ क्षेत्रों से बैलिस्टिक मिसाइलें और 167 जेट-इंजन चालित ड्रोन दागे, जिनमें से 128 ड्रोन को यूक्रेनी रक्षा प्रणाली ने मार गिराया। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में भारी क्षति दर्ज की गई:
निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र: एक औद्योगिक प्रतिष्ठान पर हुए रूसी हमले में चार लोगों की मृत्यु हो गई और पांच घायल हो गए। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैन्य उत्पादन से जुड़े धातु संयंत्रों को निशाना बनाया गया था।
कीव और मिकोलाइव: बोरिस्पिल में नौ मंजिला आवासीय इमारत क्षतिग्रस्त हुई, जबकि मिकोलाइव में एक शॉपिंग सेंटर पर हुए ड्रोन हमलों में आग लग गई और दो लोग घायल हो गए।
रूस में भी ड्रोन गिराए गए: सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन हमलों से तीन लोग घायल हुए, जबकि रूसी रक्षा मंत्रालय ने रातभर में 53 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट करने का दावा किया।
2014 से जारी तनाव और वर्तमान गतिरोध
उल्लेखनीय है कि इस संघर्ष की नींव वर्ष 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे और पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादी हिंसा से पड़ी थी, जो 24 फरवरी 2022 को रूस के पूर्णकालिक सैन्य आक्रमण में बदल गई। वर्तमान में 1,250 किलोमीटर लंबी अग्रिम रेखा पर जमीनी संघर्ष जारी है। सुरक्षा, नाटो की सदस्यता और क्षेत्रीय संप्रभुता जैसे मूल मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण शांति प्रक्रिया में चुनौतियां बनी हुई हैं।


