नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते में भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध गहराता जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग और राम मंदिर के चंदे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मुद्दों को लेकर विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ पूरी तरह लामबंद हैं। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने और मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस दिया है।
छात्रों पर कार्रवाई का विरोध और एफआईआर वापसी की मांग
कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों पर किसी भी तरह की दंडात्मक या आपराधिक पुलिस कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह आंदोलित छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाकर उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान निकाले। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष जांच में यह पाया जाता है कि छात्रों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया था, तो प्रधानमंत्री को स्वयं संसद में आकर देश के सामने बयान देना चाहिए और छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
स्थगन प्रस्ताव में गृह मंत्री के बयान और न्यायिक जांच की मांग
मणिकम टैगोर ने अपने स्थगन प्रस्ताव में मांग की है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में विस्तृत वक्तव्य दें। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल पूछे हैं कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था, इस कार्रवाई में कितनी छात्राएं घायल हुईं तथा क्या सरकार इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं समयबद्ध न्यायिक जांच कराने के लिए तैयार है।
संसद परिसर में विपक्ष का हंगामा और गतिरोध बरकरार
20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दल संसद के अंदर और बाहर लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। हालांकि सरकार नियमों का हवाला देते हुए उचित प्रक्रिया के तहत चर्चा कराने की बात कह रही है, लेकिन दोनों पक्षों के कड़े रुख के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। फिलहाल केंद्र सरकार ने विपक्ष की इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।


