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    गैस रिसाव से मचा हड़कंप, खाद फैक्ट्री के धुएं ने हाईवे तक फैलाई परेशानी

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र अंतर्गत इंदौर-उज्जैन हाईवे पर धरमपुरी के समीप स्थित रामा फास्फेट फर्टिलाइजर फैक्ट्री से अचानक निकले गैस जैसे घने सफेद गुबार ने पूरे इलाके में भारी दहशत फैला दी। देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री के आसपास का करीब 2 किलोमीटर का दायरा सफेद धुएं की मोटी चादर से ढंक गया। हालात इस कदर बिगड़ गए कि हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को सामने का रास्ता दिखना बंद हो गया, जिससे गाड़ियों के पहिए थम गए। वहीं, हवा में फैली बेहद तीखी गंध के कारण स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों का दम घुटने लगा और उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ा।

    कोहरे जैसा घना धुंध और घरों में कैद हुए लोग

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फैक्ट्री से उठा यह गुबार किसी घने कोहरे की तरह दिखाई दे रहा था। वातावरण में अचानक फैली इस तीखी और दमघोंटू गंध से घबराकर फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों ने एहतियातन अपने घरों के खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद कर लिए। कई ग्रामीण अपनी नाक और मुंह पर रुमाल या गमछा बांधकर सुरक्षात्मक रूप से घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। स्थानीय निवासियों का कहना था कि हवा में गंध इतनी तीव्र थी कि बंद घरों के भीतर भी सांस लेना दूभर हो रहा था।

    हाईवे पर थमी रफ्तार और पुराना खौफ हुआ ताजा

    धुएं के इस अचानक आए बवंडर के कारण इंदौर-उज्जैन हाईवे पर दृश्यता (विजिबिलिटी) लगभग शून्य के करीब पहुंच गई। इसके चलते राहगीरों और वाहन चालकों ने किसी बड़े हादसे की आशंका में अपनी गाड़ियां वहीं रोक दीं या अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़े, जिससे कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस फैक्ट्री के कारण इलाके में दहशत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 27 अगस्त 2023 को भी इसी फैक्ट्री परिसर में स्थित सल्फर डस्ट के एक गोदाम में भीषण आग लग गई थी, जिसके चलते कई घंटों तक आसमान में जहरीला धुआं छाया रहा था। अतीत के उसी खौफनाक हादसे की यादें ताजा होने के कारण सोमवार को धुएं का गुबार देखते ही समूचे अंचल में हड़कंप मच गया।

    फैक्ट्री में होता है रासायनिक खाद का बड़े पैमाने पर निर्माण

    उल्लेखनीय है कि धरमपुरी स्थित इस रामा फास्फेट फैक्ट्री में सल्फर डस्ट और अन्य ज्वलनशील रासायनिक पदार्थों के मिश्रण से रोजाना भारी मात्रा में 'सुपर फास्फेट' खाद का उत्पादन किया जाता है। चूंकि फैक्ट्री परिसर में हमेशा सल्फर डस्ट का भारी स्टॉक मौजूद रहता है, इसलिए वहां से उठने वाले किसी भी असामान्य धुएं या गंध को लेकर स्थानीय आबादी का चिंतित और भयभीत होना स्वाभाविक है।

    फैक्ट्री प्रबंधन की सफाई: 'यह गैस रिसाव नहीं, केवल स्टीम थी'

    पूरे मामले पर मचे हंगामे के बाद फैक्ट्री के मैनेजर जगदीश पांडा ने अपनी आधिकारिक सफाई पेश की है। उन्होंने गैस लीक की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि वर्तमान में वर्षा ऋतु के कारण बॉयलर के संचालन में बायोकोल (जैव-कोयला) का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्लांट को रीस्टार्ट या शुरू करने के दौरान शुरुआती प्रक्रिया में कुछ पलों के लिए सफेद स्टीम (व्हाइट स्मोक) का उत्सर्जन होता है। इसके बाद जब कोयला पूरी तरह सुलग जाता है, तो यह स्थिति स्वतः समाप्त हो जाती है और यह प्रक्रिया महज एक मिनट की होती है। प्रबंधन का दावा है कि प्लांट के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ऐसा धुआं नहीं निकलता और यह पूरी तरह सुरक्षित था।

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