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    वाराणसी में हादसे से हड़कंप, बंदर के गिराई ईंट बनी दुकानदार की मौत की वजह

    वाराणसी। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी काशी के हृदय स्थल दालमंडी इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के अंतर्गत चल रहे पुरानी इमारतों के ध्वस्तीकरण और निर्माण कार्य के बीच सोमवार को मरियम अस्पताल वाली गली के मोड़ पर, जंजीरा शाह मस्जिद के समीप एक भीषण हादसा हो गया। इलाके में चल रहे काम के दौरान एक अर्ध-निर्मित भवन की ऊपरी मंजिल पर कुछ बंदरों का झुंड धमाचौकड़ी मचा रहा था। इसी हुड़दंग के बीच एक बंदर के पैर से लगकर भारी-भरकम ईंट सीधे नीचे सड़क पर आ गिरी। दुर्भाग्यवश, उसी समय वहां से गुजर रहे एक स्थानीय दुकानदार के सिर पर वह ईंट सीधे जा लगी। ईंट लगते ही दुकानदार खून से लथपथ होकर वहीं जमीन पर गिर पड़ा। स्थानीय नागरिकों ने आनन-फानन में उन्हें गंभीर हालत में बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे के बाद से पूरे व्यापारिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और अफरा-तफरी का माहौल है।

    दालमंडी के प्रसिद्ध बैग व्यापारी थे मृतक चुन्नू, संभलने का भी नहीं मिला मौका

    अस्पताल और पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति की शिनाख्त दालमंडी क्षेत्र के ही जाने-माने बैग व्यवसायी 'चुन्नू' के रूप में हुई है। घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और साथी दुकानदारों ने बताया कि यह पूरा वाकया इतना अप्रत्याशित और पलक झपकते ही हुआ कि चुन्नू को अपनी जान बचाने या वहां से हटने का तनिक भी मौका नहीं मिल सका। वह रोज़ की तरह अपने काम से गली से गुजर रहे थे कि अचानक ऊपर से मौत बनकर ईंट गिरी। ईंट लगते ही उनके सिर से भारी मात्रा में खून बहने लगा और वे अचेत हो गए। बाजार के व्यापारियों ने तुरंत अपनी गाड़ियों और एम्बुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल भेजा, लेकिन सिर पर आई गंभीर आंतरिक चोट के कारण उनका प्राणांत हो गया।

    सुरक्षा मानकों को लेकर उठे सवाल, प्रतिबंधित क्षेत्रों में आवाजाही पर लापरवाही

    इस घटना के बाद दालमंडी के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि दालमंडी चौड़ीकरण और जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण का काम पिछले कई दिनों से बड़े पैमाने पर चल रहा है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने उन संकरी गलियों और निर्माण स्थलों के आसपास आम जनता के जाने पर सांकेतिक रूप से रोक लगा रखी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी न होने के कारण कई लोग और खुद व्यापारी भी अनजाने में इन प्रतिबंधित और खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे इस तरह के जानलेवा हादसों का खतरा हर वक्त बना रहता है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे संवेदनशील निर्माण स्थलों पर लोहे की जाली, ग्रीन नेट और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए ताकि बंदरों या काम के दौरान गिरने वाला मलबा नीचे चल रहे लोगों को नुकसान न पहुंचा सके।

    मौके पर पहुंची पुलिस, निर्माण एजेंसियों को सुरक्षा पुख्ता करने के कड़े निर्देश

    हादसे की भयावहता को देखते हुए सूचना मिलते ही स्थानीय थाने की पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने मलबे और निर्माण क्षेत्र का मुआयना किया और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों व दुकानदारों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी जुटाई। पुलिस के उच्चाधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक जांच और चश्मदीदों के बयानों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि यह हादसा भवन के ऊपर मौजूद बंदरों की अचानक हुई हलचल और ईंट खिसकने के कारण हुआ है।

    प्रशासनिक स्तर पर पुलिस ने एक बार फिर आम जनता और बाजार में आने वाले खरीदारों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा की खातिर उन गलियों और रास्तों का बिल्कुल भी प्रयोग न करें, जहां वर्तमान में ध्वस्तीकरण या चौड़ीकरण का भारी काम चल रहा है। इसके साथ ही, पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने निर्माण कार्य में जुटी विकास एजेंसियों और ठेकेदारों को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि वे कार्यस्थल के चारों ओर सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अन्य दुखद और अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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