More
    Homeदेशसांसद रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे के ऐलान से जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान

    सांसद रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे के ऐलान से जम्मू-कश्मीर में सियासी घमासान

    जम्मू। जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उभरी गुटबाजी के बीच सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी से लंबे समय से नाराज चल रहे श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्ला ने 3 नवंबर को लोकसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। रुहुल्ला का कहना है कि न तो पार्टी ने अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं में कोई बदलाव किया है और न ही उन्होंने अपना फैसला बदला है।

    पार्टी के भीतर असंतोष स्वाभाविक: रुहुल्ला

    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी विधायकों और नेताओं में पनपे आक्रोश को स्वाभाविक बताते हुए रुहुल्ला ने कहा कि इसमें कुछ भी हैरान करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले वे अकेले इस बात को उठा रहे थे कि कुछ लोग पार्टी को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं, लेकिन आज कई अन्य विधायक भी यही बात दोहरा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी तोड़ने की किसी कवायद में शामिल नहीं हैं और न ही किसी असंतुष्ट विधायक के संपर्क में हैं। गौरतलब है कि 3 नवंबर को उनके पिता की बरसी है, जिनकी वर्ष 2000 में आतंकी हमले में हत्या कर दी गई थी; रुहुल्ला इसी दिन अपना त्यागपत्र सौंपेंगे।

    चुनावी वादों से पीछे हटने का लगाया आरोप

    शिया समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु रुहुल्ला ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस 2024 के विधानसभा चुनाव में किए गए अपने मुख्य वादों से पीछे हट चुकी है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं पार्टी का चुनावी घोषणापत्र तैयार करने वाली समिति में शामिल थे, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे की बहाली और पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने का वादा किया गया था। इसके अतिरिक्त, आरक्षण प्रणाली को न्यायसंगत बनाने के मुद्दे को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जब उन्होंने पार्टी के मूल सिद्धांतों और राजनीतिक एजेंडे को उठाया, तो उन्हें किनारे करने की कोशिश की गई।

    फारूक अब्दुल्ला की चुनौती और बगावत का असर

    उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 26 अगस्त को पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने रुहुल्ला के बागी तेवरों को देखते हुए उन्हें पद से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव मैदान में उतरने की खुली चुनौती दी थी। रुहुल्ला ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए 3 नवंबर को इस्तीफे का ऐलान किया था। हाल ही में हुए बडगाम विधानसभा उपचुनाव में भी रुहुल्ला ने पार्टी प्रत्याशी आगा सैयद महमूद के पक्ष में चुनाव प्रचार से दूरी बना ली थी, जिसके परिणामस्वरूप नेकां उम्मीदवार को पीडीपी के आगा सैयद मुंतजिर के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here