More
    Homeदेश2026 का बजट अटका तो बढ़ा सियासी घमासान, LG से परिषद भंग...

    2026 का बजट अटका तो बढ़ा सियासी घमासान, LG से परिषद भंग करने की अपील

    श्रीनगर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने लद्दाख के प्रशासनिक ढांचे और स्थानीय विकास को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद हसन पाशा ने लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना से संपर्क कर लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी), कारगिल को तत्काल प्रभाव से भंग करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि यह परिषद अपनी प्राथमिक संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है, जिसके चलते क्षेत्र में एक गंभीर गतिरोध पैदा हो गया है।

    बजट पारित न होने से गहराया गंभीर प्रशासनिक संकट

    वरिष्ठ नेता द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कारगिल परिषद वित्तीय वर्ष 2026 के वार्षिक बजट को समय पर पारित करने में नाकाम रही है। इस महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज को मंजूरी न मिल पाने के कारण संपूर्ण कारगिल जिला एक अभूतपूर्व प्रशासनिक और आर्थिक संकट के भंवर में फंस गया है। बजट के अभाव में सरकारी खजाने से होने वाले खर्चों और नई योजनाओं को मंजूरी मिलना तकनीकी रूप से बंद हो गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन के हाथ पूरी तरह से बंध गए हैं।

    कारगिल जिले में विकास और जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित

    बजट सत्र के इस तरह बेनतीजा रहने और वित्तीय गतिरोध के कारण कारगिल जिले के भीतर चल रही तमाम विकास गतिविधियां और बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर सड़कों, पुलों और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं से जुड़ी नई परियोजनाओं की शुरुआत पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। इसके साथ ही, आम जनता के लिए चलाई जाने वाली विभिन्न सामाजिक और जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी अधर में लटक गया है, जिससे आम नागरिकों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

    उपराज्यपाल से हस्तक्षेप और नए सिरे से व्यवस्था की अपील

    पार्टी नेतृत्व ने उपराज्यपाल से इस गंभीर विषय पर तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि जब कोई चुनी हुई परिषद अपनी बुनियादी वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में अक्षम साबित हो, तो उसे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता। क्षेत्र को इस अनिश्चितता और पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए परिषद को तुरंत भंग किया जाना चाहिए, ताकि लद्दाख के इस महत्वपूर्ण हिस्से में विकास की गति को दोबारा पटरी पर लाया जा सके और जनता के हितों की रक्षा की जा सके।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here