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    Homeराज्यमध्यप्रदेशसिंहस्थ की तैयारी, खजराना गणेश मंदिर में विकास कार्य तेज

    सिंहस्थ की तैयारी, खजराना गणेश मंदिर में विकास कार्य तेज

    इंदौर। देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के केंद्र, प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में आगामी सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों को लेकर बड़े स्तर पर विकास कार्य शुरू कर दिए गए हैं। मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भगवान गणेश के गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, और अब मंदिर के सभामंडप के जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सभामंडप को डेढ़ फीट नीचे करने का काम शुरू

    खजराना गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि गर्भगृह के ठीक बाहर स्थित सभामंडप को करीब डेढ़ फीट नीचे करने का काम शुरू कर दिया गया है। दरअसल, वर्तमान व्यवस्था में जब विशिष्ट जन (वीआईपी) या नवविवाहित जोड़े सभामंडप में बैठकर विशेष पूजन-अर्चन करते हैं, तो उनके पीछे सामान्य कतार में खड़े आम भक्तों को भगवान के दर्शन करने में भारी असुविधा होती थी। इस ऊंचाई को डेढ़ फीट कम कर देने से अब कतार में लगे श्रद्धालु बिना किसी बाधा के बप्पा की मनोहारी छवि के सीधे दर्शन कर सकेंगे।

    मास्टर प्लान के तहत बदलेगी मंदिर की सूरत

    प्रशासन द्वारा खजराना गणेश मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए एक विस्तृत 'मास्टर प्लान' तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत कई चरणों में निर्माण कार्य होने हैं। शुरुआती चरण में भक्तों की सहूलियत को प्राथमिकता देते हुए गर्भगृह और सभामंडप के हिस्से को व्यवस्थित किया जा रहा है। इसके बाद अगले चरण में यहां एक विशाल और आधुनिक 'दर्शन हॉल' का निर्माण भी किया जाना है। इस नए दर्शन हॉल के बनने से एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां रुक सकेंगे और बिना किसी अव्यवस्था के कतारबद्ध होकर आगे बढ़ते हुए सुगमता से दर्शन लाभ ले पाएंगे।

    सिंहस्थ महापर्व को लेकर की जा रही हैं तैयारियां

    आगामी सिंहस्थ उज्जैन के दौरान इंदौर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के खजराना गणेश मंदिर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सिंहस्थ के समय उमड़ने वाले इस भारी जनसैलाब को संभालने और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के उद्देश्य से ही इन बुनियादी ढांचों को समय रहते सुधारा जा रहा है। मंदिर प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यही है कि सिंहस्थ के दौरान देश-दुनिया से आने वाले किसी भी दर्शनार्थी को बप्पा के दर्शन करने में परेशानी न हो और वे एक सुखद आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटें।

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