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    पेट्रोल-डीजल की खुली बिक्री पर सख्ती, छत्तीसगढ़ सरकार ने जारी किए नए निर्देश

    रायपुर | पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में ईंधन (पेट्रोल और डीजल) की जमाखोरी और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए ड्रम, बोतल या जरीकेन जैसे खुले बर्तनों में इसकी बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। खाद्य विभाग द्वारा इस संबंध में राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, सरकार ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया है कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसी को भी परेशान होने या घबराने की आवश्यकता नहीं है।

    करोड़ों लीटर का स्टॉक मौजूद, अफवाहों पर न दें ध्यान

    आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कुल 2,516 पेट्रोल पंपों पर 22 मई 2026 तक लगभग 4.35 करोड़ लीटर पेट्रोल और 8.15 करोड़ लीटर डीजल का सुरक्षित भंडार उपलब्ध है। खाद्य विभाग ने साफ किया है कि डिपो से तेल की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। सरकार ने जनता से यह भी अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर चल रही किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें और बेवजह ईंधन का स्टॉक घर पर जमा न करें।

    किसानों और आपातकालीन सेवाओं के लिए नियमों में ढील

    आम जनता के लिए प्रतिबंध लगाने के साथ ही सरकार ने खेती-किसानी और अन्य आवश्यक सेवाओं का भी ख्याल रखा है। कृषि कार्यों (रबी और खरीफ सीजन) के लिए किसानों को तय प्रक्रिया के तहत खुले बर्तनों में डीजल लेने की छूट रहेगी। इसके अलावा अस्पतालों, मोबाइल टावरों के संचालन और जिला प्रशासन से स्वीकृत सरकारी निर्माण कार्यों के लिए भी जरूरी सुरक्षा मानकों और संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (SDM) की जांच के बाद तेल देने की अनुमति होगी।

    कड़ाई से होगा पालन, उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई

    प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना किसी ठोस और वैध कारण के खुले में पेट्रोल या डीजल बेचना 'अवैध बिक्री' के दायरे में आएगा। जो भी पेट्रोल पंप संचालक इन नियमों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल आदेश 2005 के साथ-साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ईंधन की सुचारु सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सचिव लगातार ऑयल कंपनियों के साथ बैठकें कर रहे हैं और लखौली, मंदिर हसौद व गोपालपुर डिपो से लगातार नजर रखी जा रही है।

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