नई दिल्ली | केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार की प्रशासनिक और राजनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 9 जून को सरकार के दो वर्ष पूरे होने तथा 10 जून को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की परिषद की बैठक के तुरंत बाद केंद्रीय कैबिनेट में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा। इस विस्तार के संपन्न होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय संगठन की नई टीम की रूपरेखा भी सामने आ जाएगी।
संगठन को मजबूत करने के लिए मंत्रियों के इस्तीफे संभव
राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली प्रदेश इकाई की कमान संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा और आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्य उत्तर प्रदेश के संगठन प्रमुख पंकज चौधरी संगठनात्मक कार्यों पर अपना पूरा ध्यान लगाने के लिए जल्द ही केंद्रीय मंत्री पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई सांगठनिक टीम के गठन पर भी शीर्ष नेतृत्व में गहन विचार-विमर्श चल रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद 20 जून से पहले इस कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, जिसके तुरंत बाद राष्ट्रीय संगठन के नए पदाधिकारियों की सूची भी जारी कर दी जाएगी।
आगामी विधानसभा और आम चुनावों को देखते हुए गहन मंथन
इस बार सरकार और संगठन दोनों के स्तर पर बनने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई टीम में आगामी लोकसभा चुनाव तक किसी बड़े बदलाव की गुंजाइश नहीं होगी। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी को अगले वर्ष के शुरुआती महीनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के चुनावी दंगल में उतरना है, जबकि साल के अंत में गुजरात और मणिपुर जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और संगठन की नई टीमों के जरिए देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों के बीच एक सटीक संतुलन साधना बेहद जरूरी है, यही वजह है कि दोनों सूचियों को अंतिम रूप देने से पहले शीर्ष स्तर पर काफी बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्रियों के बीच बैठकों का दौर जारी
सत्ता और संगठन को नया रूप देने के लिए ही हालिया पांच राज्यों के चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद से विभिन्न प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की केंद्रीय आलाकमान के साथ ताबड़तोड़ बैठकें हो रही हैं। नतीजों के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने देश की राजधानी पहुंचकर केंद्रीय नेताओं से संवाद किया है। इसके साथ ही, खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी लगातार राज्यों के दौरों पर हैं, जहां वे ओडिशा और कर्नाटक के संगठनात्मक दौरों को पूरा करने के बाद अब उत्तराखंड के प्रवास पर रणनीति बनाने में जुटे हैं।


