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    प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्विशा शर्मा केस में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर किया हमला

    महाराष्ट्र। राजधानी के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर शिवसेना (UBT) की वरिष्ठ महिला नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मोर्चा खोल दिया है। प्रियंका चतुर्वेदी ने पीड़िता की सास और सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) न्यायाधीश गिरिबाला सिंह द्वारा दिए गए हालिया बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि 'औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन होती है' वाले मुहावरे को कोई शक्ल देनी हो, तो वह चेहरा इस महिला (गिरिबाला सिंह) का ही होगा।

    'कानून की समझ का हो रहा गलत इस्तेमाल, जो दुनिया में नहीं उसे किया जा रहा बदनाम'

    प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनी पोस्ट में गिरिबाला सिंह के अतीत का हवाला देते हुए लिखा कि चूंकि वह खुद एक पूर्व न्यायाधीश रही हैं, इसलिए वे यह बहुत अच्छी तरह जानती हैं कि कानूनी दांव-पेंचों को अपने पक्ष में कैसे मोड़ा जाता है। शिवसेना नेता ने आरोप लगाया कि एक ऐसी लाचार महिला को दोषी ठहराना और बदनाम करना बेहद आसान है, जो आज अपना पक्ष रखने या अपनी सफाई देने के लिए इस दुनिया में जीवित ही नहीं है। उन्होंने इस पूरे कृत्य को बेहद असंवेदनशील करार दिया।

    सास गिरिबाला सिंह ने बयानों में किए थे कई चौंकाने वाले दावे

    इस पूरे विवाद की जड़ वह इंटरव्यू है जो ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनकी सास गिरिबाला सिंह ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान दिया था। अपने बयान में पूर्व जज ने दावा किया था कि ट्विशा ने गर्भपात यानी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ($MTP$) की प्रक्रिया शुरू तो कर दी थी, लेकिन बाद में उसने इसे बीच में ही रोकने की इच्छा जताई थी, जो कि चिकित्सकीय रूप से मुमकिन नहीं था। उन्होंने यह भी दलील दी थी कि उनका परिवार इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्विशा के साथ खड़ा था। इसके अलावा उन्होंने ट्विशा के पति और उसके मायके वालों को लेकर भी कई बातें कही थीं, जिसने इस विवाद को और हवा दे दी।

    चरित्र हनन की कोशिश का आरोप, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    प्रियंका चतुर्वेदी ने इन्हीं दावों को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि जो बेटी अब इस दुनिया से जा चुकी है, उसके व्यक्तिगत फैसलों और चरित्र पर इस तरह सरेआम उंगली उठाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आशंका जताई कि पूर्व जज होने के नाते अपनी रसूख का इस्तेमाल कर मुख्य मामले की निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

    मामला कोर्ट में विचाराधीन, पुलिस खंगाल रही हर पहलू

    यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला इस समय कोर्ट के विचाराधीन है और स्थानीय पुलिस हर एक बिंदु को ध्यान में रखकर गहराई से तफ्तीश कर रही है। दूसरी तरफ, इस बयानबाजी के सामने आने के बाद से ही इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आम लोगों के बीच बहस काफी तेज हो गई है।

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