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    रेवंत रेड्डी कांग्रेस छोड़ BJP में जाएंगे? धर्मपुरी अरविंद के दावे से तेलंगाना की राजनीति गरम

    हैदराबाद: तेलंगाना की सियासत में एक बार फिर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। निजामाबाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद धर्मपुरी अरविंद के एक सनसनीखेज दावे ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। भाजपा सांसद ने साफ तौर पर इशारा किया है कि सूबे के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी आने वाले दिनों में कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर कयासबाजियों का दौर शुरू हो गया है।

    रेवंत रेड्डी की सुवेंदु अधिकारी से तुलना

    भाजपा सांसद धर्मपुरी अरविंद ने मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के सियासी भविष्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री की तुलना पश्चिम बंगाल के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी से करते हुए कहा कि रेवंत रेड्डी कांग्रेस के लिए 'कल के सुवेंदु अधिकारी' साबित होने वाले हैं। गौरतलब है कि सुवेंदु अधिकारी ने साल 2020 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को अलविदा कहकर भाजपा का दामन थाम लिया था और बाद में विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को ही मात दी थी। अरविंद का मानना है कि ठीक इसी तर्ज पर रेवंत रेड्डी भी तेलंगाना में कांग्रेस को एक बहुत बड़ा झटका दे सकते हैं।

    पीएम मोदी की सराहना और बदलती केमिस्ट्री

    इस बड़े दावे के पीछे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल के दिनों में दिखी नजदीकियों को भी एक अहम वजह माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से रेवंत रेड्डी ने कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली की खुलकर तारीफ की है। सरकारी कार्यक्रमों के दौरान दोनों नेताओं के बीच की जुगलबंदी और रेवंत रेड्डी द्वारा पीएम मोदी को 'बड़ा भाई' कहकर संबोधित करने के मामले ने सियासी पंडितों को पहले ही सोचने पर मजबूर कर दिया था, और अब भाजपा सांसद के बयान ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

    कांग्रेस में अंतर्कलह और गिरता ग्राफ

    राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के कुछ नीतिगत फैसलों और काम करने के तौर-तरीकों से पूरी तरह खुश नहीं है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री पर विपक्ष को दबाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं। सांसद अरविंद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने में नाकाम रही है, जिससे मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ गिरा है और यही वजह है कि वे अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नया रास्ता तलाश रहे हैं।

    कांग्रेस का पलटवार और बीआरएस का तंज

    इस सियासी धमाके पर कांग्रेस पार्टी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी प्रवक्ताओं ने भाजपा सांसद के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल एक 'माइंड गेम' और मनगढ़ंत कहानी बताया है। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में सरकार पूरी तरह स्थिर और मजबूत है, और भाजपा अपनी जमीन खिसकती देख इस तरह की अफवाहों का सहारा ले रही है। वहीं दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रही अंदरूनी साठगांठ अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।

    आगामी चुनाव और भाजपा की रणनीति

    इस पूरे विवाद का एक सिरा दोनों नेताओं के बीच की पुरानी सियासी अदावत से भी जुड़ा हुआ है। भाजपा सांसद अरविंद लगातार 'आरआर टैक्स' जैसे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और वादाखिलाफी को लेकर मुख्यमंत्री पर हमलावर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए भाजपा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ना चाहती है, ताकि राज्य में खुद को कांग्रेस के एकमात्र मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया जा सके। बहरहाल, अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी इस पूरे मामले पर खुद क्या रुख अपनाते हैं।

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