रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में सक्रिय नक्सलवाद के पूर्ण सफाए और हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास को लेकर प्रदेश की साय सरकार द्वारा लगातार कड़े एवं महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के कल्याण के लिए कई विशेष योजनाओं का क्रियान्वयन किया है, जिसके तहत उन्हें तमाम आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इस बीच, भानुप्रतापपुर ब्लॉक के चौगेल पुनर्वास केंद्र में रह रहे पूर्व नक्सलियों ने जिला प्रशासन के कलेक्टर को एक ज्ञापन पत्र सौंपा है, जिसमें सरकार पर उनके पुनर्वास से जुड़े वादों को पूरा करने में देरी करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
पूर्व नक्सलियों की प्रमुख माँगें और 16 सूत्रीय ज्ञापन
पुनर्वासित नक्सलियों द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए 16 बिंदुओं के इस बहुप्रतीक्षित मांग पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि शासन स्तर पर उनसे जो वादे किए गए थे, उन्हें अमली जामा पहनाने में प्रशासनिक सुस्ती बरती जा रही है। पूर्व नक्सलियों ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि यदि निर्धारित नियमों के तहत उन्हें सरकारी नौकरी या स्थायी रोजगार मुहैया कराने में विलंब होता है, तो पुनर्वास नीति के प्रावधानों के अनुसार उन्हें तत्काल 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जानी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग उठाई है कि वर्तमान में विभिन्न जेलों में बंद नक्सलियों और उनके भूमिगत समर्थकों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द पुनर्वास केंद्रों में स्थानांतरित किया जाए।
इनाम राशि के भुगतान और लंबित वित्तीय मांगों पर जोर


ज्ञापन के माध्यम से पूर्व नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के समय घोषित इनाम की राशि के पूर्ण भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनकी मांगों में मुख्य रूप से एसी सचिव स्तर के नक्सलियों के लिए 8 लाख के घोषित इनाम पर 5 लाख रुपये तथा डीवीसी सचिव स्तर के कैडरों के लिए 10 लाख के इनाम पर 8 लाख रुपये का आंशिक भुगतान तत्काल किए जाने की बात कही गई है। शांतिपूर्ण जीवन की राह चुनने वाले इन पूर्व उग्रवादियों का कहना है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के बावजूद उन्हें आज भी एक सम्मानजनक जिंदगी और शासन की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता का बेसब्री से इंतजार है।
छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के प्रावधान
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन की वर्तमान नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत हथियार डालने वाले सभी कैडरों को समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने के लिए नियमानुसार विभिन्न हितकारी सुविधाएं दी जाती हैं। इस नीति के तहत आत्मसमर्पित उग्रवादियों को जीवनयापन के लिए आर्थिक सहायता, आधुनिक कौशल विकास का प्रशिक्षण, आवास सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा स्वरोजगार और रोजगार के विशेष अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे सभी पुरानी विसंगतियों को पीछे छोड़कर एक गरिमापूर्ण और नया जीवन व्यतीत कर सकें।


