भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में शरीर में आयरन की कमी होना एक बेहद आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। विशेषकर महिलाओं, बढ़ते बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) वाले लोगों में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने की शिकायत सबसे ज्यादा पाई जाती है। जब शरीर में इस जरूरी तत्व की कमी होती है, तो व्यक्ति बिना ज्यादा काम किए भी थका हुआ महसूस करने लगता है। इसके अलावा अचानक चक्कर आना, मांसपेशियों में शिथिलता, लगातार सिरदर्द रहना और थोड़ा सा चलने पर भी सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
अक्सर लोग शरीर में खून बढ़ाने के लिए तुरंत सप्लीमेंट्स या एलोपैथिक दवाइयों का रुख करते हैं, जबकि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों मानते हैं कि सही खानपान से इसे प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। असल में, हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो भोजन से आयरन को सोखने की शरीर की क्षमता (एब्जॉर्प्शन) को ब्लॉक कर देती हैं। इसलिए, केवल अच्छी चीजें खाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन चीजों से दूरी बनाना भी जरूरी है जो रुकावट पैदा करती हैं। आइए जानते हैं कि आयरन डेफिशियेंसी होने पर किन आदतों को छोड़ना चाहिए और उनकी जगह किन सेहतमंद विकल्पों को अपनाना चाहिए।
डाइट से तुरंत आउट करें ये 5 चीजें और अपनाएं ये हेल्दी ऑप्शंस
1. भोजन के बाद चाय-कॉफी की लत
कई लोगों को दोपहर या रात के खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने की आदत होती है। इन पेयों में मौजूद 'टैनिन' और 'कैफीन' जैसे तत्व खाए गए भोजन से आयरन को शरीर में मिलने नहीं देते, जिससे खाया-पिया सब बेकार चला जाता है।
बदले में क्या लें: चाय-कॉफी की जगह अपनी डाइट में नारियल पानी, शिकंजी (नींबू पानी), ताजे आंवले का रस या मौसमी फलों के जूस को शामिल करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी शरीर में आयरन के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है।
2. पैकेटबंद और अत्यधिक जंक फूड
पिज्जा, बर्गर, पास्ता और बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड फूड्स में पोषण की मात्रा शून्य के बराबर होती है। ये सिर्फ शरीर को 'एम्प्टी कैलोरीज' (खोखली ऊर्जा) देते हैं, जिससे मोटापा तो बढ़ता है लेकिन अंदरूनी रूप से खून की कमी और गंभीर हो जाती है।
बदले में क्या लें: घर में तैयार संतुलित और पारंपरिक भोजन करें। अपनी थाली में काली चने, अरहर और मसूर की दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, चौलाई, मेथी) और साबुत अनाजों को प्राथमिकता दें।
3. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और सोडा
गर्मियों में प्यास बुझाने के नाम पर पिए जाने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और रंग-बिरंगे सोडा ड्रिंक्स पेट के स्वास्थ्य को बिगाड़ते हैं। ये शरीर की न्यूट्रिएंट्स (पोषक तत्वों) को ग्रहण करने की प्राकृतिक प्रणाली को धीमा कर देते हैं।
बदले में क्या लें: शरीर को अंदर से हाइड्रेट और एनर्जेटिक रखने के लिए छाछ, भुने जीरे वाली नमकीन लस्सी, सत्तू का शर्बत या पुदीने का पानी पिएं। ये पाचन तंत्र को मजबूत कर खून बनाने की प्रक्रिया में मदद करते हैं।
4. सफेद चीनी और अत्यधिक मीठा
रिफाइंड शुगर या ज्यादा मीठी चीजें खाने से शरीर को तुरंत तो थोड़ी एनर्जी मिलती है, लेकिन यह लंबे समय में कमजोरी और थकान को बढ़ा देती है क्योंकि इसमें कोई विटामिंस या मिनरल्स नहीं होते।
बदले में क्या लें: मीठे के शौकीन लोग चीनी की जगह प्राकृतिक मिठास का इस्तेमाल करें। आयरन से भरपूर काले खजूर, सूखी किशमिश, शुद्ध देसी गुड़ और गुड़-मूंगफली की चिक्की का सेवन करें, जो शरीर में हीमोग्लोबिन को तेजी से बूस्ट करते हैं।
5. मैदे से बने बेकरी आइटम्स
सफेद ब्रेड, बिस्कुट, मफिंस और मैदे से तैयार खाद्य पदार्थों में फाइबर और जरूरी पोषक तत्व पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इनका लगातार सेवन आंतों को कमजोर करता है और खून की कमी का कारण बनता है।
बदले में क्या लें: मैदे की रोटियों या ब्रेड को छोड़ें और चोकरयुक्त मल्टीग्रेन आटा, रागी, ज्वार या जौ की रोटियों को अपने मुख्य भोजन का हिस्सा बनाएं। इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से आयरन पाया जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी मुख्य सलाह (टेकअवे):
आयरन की कमी से निपटने के लिए केवल गोलियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रसोई और खानपान की आदतों में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव करें। यदि रोजमर्रा के भोजन में इन पांच अनुपयोगी चीजों को हटाकर सही पोषण वाले विकल्पों को जगह दी जाए, तो बिना किसी साइड इफेक्ट के हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य किया जा सकता है और शरीर की सुस्ती को हमेशा के लिए दूर भगाया जा सकता है।


