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    Homeराज्यछत्तीसगढ़कुलसचिव नियुक्ति को लेकर राजभवन और विश्वविद्यालय आमने-सामने, आदेश का इंतजार

    कुलसचिव नियुक्ति को लेकर राजभवन और विश्वविद्यालय आमने-सामने, आदेश का इंतजार

    अंबिकापुर| संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलसचिव की नियुक्ति को लेकर चल रही खींचतान अब महज एक सामान्य प्रशासनिक विवाद नहीं रह गई है। राजभवन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह मामला उच्च शिक्षा विभाग में अटका हुआ नजर आ रहा है, जिसके चलते राज्यपाल सचिवालय को एक बार फिर पत्र लिखकर शासन को जरूरी कार्रवाई की याद दिलानी पड़ी है।

    राज्यपाल के बार-बार निर्देशों के बावजूद नियुक्ति आदेश में देरी

    राज्यपाल के अवर सचिव की ओर से छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए आधिकारिक पत्र में डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी के स्थान पर नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का आदेश तत्काल प्रभाव से जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशों के अनुपालन में यह पुनः अनुरोध किया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत अनुमोदन का स्पष्ट जिक्र

    पत्र में इस बात का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है कि छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा-15(7) के प्रावधानों के तहत किसी अन्य योग्य प्रोफेसर को संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में नियमित कुलसचिव के रूप में पदस्थ करने के प्रस्ताव पर महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति का अनुमोदन पहले ही प्राप्त किया जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया आगे न बढ़ने पर राजभवन ने उच्च शिक्षा विभाग से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    'तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर सचिवालय को अवगत कराएं'

    राजभवन के अवर सचिव ने अपने पत्र में कड़े शब्दों में कहा है कि माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति के आदेशानुसार यह फिर से अनुरोध किया जाता है कि डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी के स्थान पर नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का आदेश तुरंत जारी किया जाए और इसकी सूचना सचिवालय को दी जाए। इस प्रकार राजभवन की ओर से अब पूरी गेंद उच्च शिक्षा विभाग के पाले में डाल दी गई है।

    विश्वविद्यालय में बढ़ सकती है प्रशासनिक टकराव की स्थिति

    संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच पहले से ही विवाद की स्थिति सामने आती रही है, ऐसे में राजभवन का यह ताजा पत्र इस मामले को और अधिक गंभीर बना रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब राजभवन की तरफ से कार्रवाई के लिए दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी हो चुके हैं, तब उच्च शिक्षा विभाग इस संबंध में अंतिम आदेश कब तक जारी करेगा।

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