मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में आज के कारोबारी सत्र की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिकने में नाकाम रहने के कारण बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव का दौर शुरू हो गया। शुरुआती घंटों में एशियाई बाजारों की मजबूती का सहारा लेते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः 74,950 और 23,500 के महत्वपूर्ण स्तरों को पार किया, परंतु कुछ ही समय में निवेशकों द्वारा की गई चौतरफा मुनाफावसूली ने इस बढ़त को पूरी तरह धो दिया। वर्तमान स्थिति में दोनों ही प्रमुख सूचकांक लाल निशान के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है।
कच्चे तेल की कीमतों और इंडिया विक्स का अनिश्चित प्रभाव
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई मामूली गिरावट ने सुबह के समय भारतीय शेयर बाजार को कुछ राहत प्रदान की थी, लेकिन ब्रेंट क्रूड का अभी भी 107 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसके साथ ही बाजार की अस्थिरता को मापने वाला 'इंडिया विक्स' शुरुआती नरमी के बाद अचानक उछलकर 19 के स्तर को पार कर गया है, जिसने निवेशकों के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया है। डर के इस सूचकांक में आई बढ़त के कारण लोग जोखिम लेने से बच रहे हैं और बाजार से अपनी पूंजी सुरक्षित बाहर निकालने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोने-चांदी पर आयात शुल्क का बाजार की धारणा पर असर
केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के फैसले ने भी बाजार की रौनक कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस अप्रत्याशित कदम से न केवल आभूषण क्षेत्र की कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, बल्कि इसने बाजार की समग्र धारणा को भी प्रभावित किया है। आयात शुल्क में इस ढाई गुना बढ़ोतरी को वित्तीय विशेषज्ञ बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत मान रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं से जुड़ी ट्रेडिंग और संबंधित शेयरों में बिकवाली का दबाव गहरा गया है।
मुनाफावसूली की होड़ और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट
बाजार में आई शुरुआती तेजी को भुनाने के उद्देश्य से निवेशकों ने ऊंचे भावों पर जमकर मुनाफावसूली की, जिसके चलते सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 850 अंक नीचे गिर गया। सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी बैंकों के शेयरों में देखा जा रहा है, जहां निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में एक प्रतिशत से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है, जिससे स्पष्ट हो रहा है कि छोटे और मझोले शेयरों के साथ-साथ दिग्गज कंपनियों में भी बिकवाली हावी है।
बाजार में भविष्य की दिशा और तकनीकी चुनौतियां
सूचकांकों के अपने सर्वोच्च स्तरों से फिसलने के बाद तकनीकी रूप से बाजार अब एक नाजुक मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी और सेंसेक्स अपने मौजूदा निचले स्तरों को संभालने में नाकाम रहते हैं, तो गिरावट का यह सिलसिला और भी बढ़ सकता है। फिलहाल ट्रेडर्स की नजरें वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की अगली चाल पर टिकी हैं क्योंकि ब्रॉडर मार्केट में स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में भी वैसी ही बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है जो फ्रंटलाइन इंडेक्स में मौजूद है।


