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    AI से किशोर का वीडियो बनाकर माता-पिता को दी धमकी, कहा-गला काटकर मार देंगे; एक लाख वसूले

    MP News: इंदौर में साइबर अपराधियों ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर डीपफेक वीडियो बनाकर एक परिवार को डिजिटल अरेस्ट करने की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है. अपने माता पिता की डांट फटकार से दुखी होकर छात्र शहर से बाहर चला गया था. छात्र की तलाश में परिवार ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टर्स वायरल किए थे, उसी से डीपफेक वीडियो बनाकर साइबर बदमाशों ने वारदात को अंजाम दे डाला.

    बदमाशों ने परिवार को वीडियो कॉल कर छात्र को बंधक बनाने और रुपये नहीं देने पर चाकू से उसका गला काटने की धमकी दी. इसके बाद परिवार से 1 लाख 2 हजार रुपये वसूल लिए. खास बात यह रही कि कुछ ही घंटों बाद किशोर सुरक्षित मिला और उसे इस पूरे वीडियो कॉल और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट की कोई जानकारी नहीं थी.

    कोचिंग के लिए घर से निकला था किशोर

    इस मामले में लापता नाबालिग के माता-पिता मुकेश और पूजा प्रजापति की ओर से शिकायत क्राइम ब्रांच को की गई है, जहां पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पीड़ित माता-पिता पूजा प्रजापत और गोविंद प्रजापत के मुताबिक उनका 16 वर्षीय बेटा 2 फरवरी को कोचिंग के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा. अगले दिन अज्ञात बदमाशों ने वीडियो कॉल कर बच्चे को बंधक बनाने जैसी स्थिति में दिखाया और खुद को अपहरणकर्ता बताते हुए परिवार को डराना शुरू कर दिया. वीडियो कॉल में किशोर के साथ मारपीट और चाकू से हमला करने की धमकी दी गई. यहां तक कि गला काटने और किडनी बेचने जैसी बातें कहकर परिवार पर मानसिक दबाव बनाया गया.

    किस्तों में एक लाख 2 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए

    पहले 30 हजार रुपये मांगे गए और फिर अलग-अलग किस्तों में कुल 1 लाख 2 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए. घबराए परिजनों ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर रकम जुटाई और आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में भेज दी. इसी बीच कुछ घंटों बाद किशोर ने खुद अपने माता-पिता से संपर्क किया. उसने सांवरिया सेठ मंदिर में दर्शन करके देवास लौटने की जानकारी दी. परिजन उसे देवास रेलवे स्टेशन से लेकर इंदौर लौटे. किशोर ने बताया कि उसे किसी वीडियो कॉल या डिजिटल अरेस्ट की जानकारी नहीं है. वहीं इस घटना के बाद दंपत्ति ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एआई आधारित साइबर ठगी और डीपफेक वीडियो बनाकर ठगी किए जाने के एंगल से जांच शुरू कर दी है. ट्रांजेक्शन डिटेल्स के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है.

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