नई दिल्ली । केंद्र सरकार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 75 फीसदी करने की योजना बना रही है। यह पहल बाजार नियामक सेबी के उस अनिवार्य नियम का पालन करने के लिए की जा रही है, जिसके तहत शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों में कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी आम जनता के पास होना आवश्यक है। वर्तमान में इन चारों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 75 फीसदी से काफी अधिक है। नियामक के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए, सरकार ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से अपनी अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचेगी। इसके अतिरिक्त, बैंक खुद भी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट जैसे तरीकों का उपयोग करके बाजार से फंड जुटा सकते हैं, जो मुख्य रूप से संस्थागत खरीदारों के लिए होगा। बैंक-वार हिस्सेदारी घटाने का विवरण इस प्रकार है-
1. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: सरकार की मौजूदा 81.19 फीसदी हिस्सेदारी को 75 फीसदी पर लाने के लिए लगभग 6.2 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी।
2. यूको बैंक: इसमें सरकार की 90.95 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे 75 फीसदी के स्तर पर लाने के लिए करीब 16 फीसदी हिस्सेदारी कम करनी होगी। यह ओएफएस और क्यूआईपी दोनों तरीकों से हो सकता है।
3. पंजाब एंड सिंध बैंक: यहां सरकार की हिस्सेदारी 93.85 फीसदी है, जिसके कारण लगभग 19 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की आवश्यकता होगी।
4. इंडियन ओवरसीज बैंक: बैंक में सरकार की 92.44 फीसदी हिस्सेदारी है, जिससे उसे अपनी हिस्सेदारी में लगभग 17.44 फीसदी की कटौती करनी होगी ताकि सेबी के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन किया जा सके।
सरकार चार सरकारी बैंकों में घटाएगी हिस्सेदारी


