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    गोरखपुर में 8 दिन से लापता शिकारी तेंदुआ, जमीन खा गई या आसमान निगल गया?

    गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पिछले एक सप्ताह से एक तेंदुए के आतंक से लोग बेहद डरे हुए हैं। डर लगातार बढ़ता जा रहा है। क्योंकि अब तक तेंदुए को पकड़ा नहीं जा सका है। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे हो या बूढ़े,महिलाएं या फिर नौजवान सभी के मन में खौफ इस कदर बैठ गया है कि लोग घर से निकलना ही बंद कर दिए हैं। वही संबंधित विभाग का कहना है कि जल्द ही तेंदुए का रेस्क्यू कर लिया जाएगा। हालांकि लोग अब शंका भी व्यक्त करने लगे हैं कि वास्तव में तेंदुआ है भी या सिर्फ अफवाह मात्र है। हालांकि पिछले चार दिनों से वन विभाग द्वारा दो पिंजड़े लाकर रखे गए हैं। ड्रोन से मॉनिटरिंग भी की जा रही है।

    शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर और आसपास के मोहल्ले में पिछले एक सप्ताह से भय और आतंक का माहौल बना हुआ है। इसका कारण एक तेंदुए की मौजूदगी बताई जा रही है। बीते सोमवार को सीसी फुटेज कैमरे में रिकॉर्ड होने के बाद से अब तक तेंदुए का कुछ पता नहीं है। हालांकि उसी दिन अल सुबह दो महिलाओं को घायल करने का दावा किया जा रहा है। कुछ लोगों ने उसे देखने की भी बात कही है।

    बावजूद इसके वन विभाग की टीम द्वारा लगातार रेस्क्यू अभियान चलाए जाने के बाद भी अब तक तेंदुए का कुछ अता-पता नहीं चल पाया है। इस वजह से आसपास के लोग डरे और सहमे हुए हैं। क्योंकि तेंदुए का खौफ उनके मन मस्तिक पर लगातार हावी होता जा रहा है। वहीं छोटे बच्चों को स्कूल जाना होता है। पुरुषों को अपने काम पर और महिलाएं अकेली घर पर रहती हैं। ऐसे में जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता लोगों का डर बारकरार रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि आसपास कई स्कूल है। जिन्हें ना तो कोई निर्देश जारी है और ना ही प्रबंधन ने अपनी तरफ से सुरक्षा के दृष्टिगत स्कूलों को बंद किया है।
      
    मोहनापुर में स्थित एक प्रतिष्ठित स्कूल के प्रधानाचार्य से जब बात की गई तो उनका कहना था कि हमें ऊपर से कोई निर्देश नहीं है। हमने वन विभाग के अधिकारी और रेंजर से बात की थी उन्होंने आश्वस्त किया था कि डरने वाली बात नहीं है, सुरक्षा के पूरे इंतजाम है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर बच्चों की जान जोखिम में डालने का अधिकार किसने दिया? जबकि किसी भी सक्षम अधिकारी की तरफ से कोई निर्देश जारी नहीं है। क्या स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ दिनों के लिए अवकाश घोषित नहीं कर सकता। क्षेत्रवासियों का कहना है कि हम लोग हाथों में लाठी डंडे लेकर कब तक पहरेदारी करते रहेंगे।

    वही डीएफओ से लेकर बीएससी तक का फोन घनघनाया गया, लेकिन किसी ने फोन रिसीव करने की जहमत नहीं उठाई। अभिभावकों का कहना है कि हमारे बच्चों की सुरक्षा किसके हवाले है? यदि तेंदुए की मौजूदगी है तो यह बेहद चिंता जनक है। क्योंकि अब तक वह पकड़ा नहीं गया और यदि अफवाह है तो प्रशासन को इस पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह और भी खतरनाक है।

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