बोले– युद्ध लगभग खत्म, कोई चालाकी की तो ईरान का नामो-निशान मिट जाएगा
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यह युद्ध अब लगभग पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने किसी प्रकार की चालाकी या आक्रामक कदम उठाने की कोशिश की, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान अब सैन्य रूप से बेहद कमजोर हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब प्रभावी नौसेना, संचार प्रणाली और वायु सेना जैसी सैन्य क्षमताएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइलें भी खत्म होने के कगार पर हैं और उसके ड्रोन लगातार नाकाम किए जा रहे हैं।
ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगर ईरान ने कुछ भी बुरा करने की कोशिश की, तो यह उसके लिए विनाशकारी होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो सकता है और दुनिया में फिर उसका नाम तक नहीं सुना जाएगा।
ईरान ने ट्रंप के दावों को किया खारिज
ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के अधिकारियों ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला वाशिंगटन नहीं बल्कि तेहरान करेगा।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजरायल की ओर से हमले जारी रहे, तो ईरान इस पूरे क्षेत्र से तेल आपूर्ति रोक सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया, तो वैश्विक तेल बाजार पर इसका गंभीर असर पड़ेगा और कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
मिसाइल हमलों से बढ़ा तनाव
इस बीच युद्ध के मैदान में स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान ने इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए खुर्रमशहर, फतह और खैबर जैसी हाइपरसॉनिक और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। इन हमलों ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है।
खाड़ी देशों में भी बढ़ी चिंता
संघर्ष के चलते खाड़ी देशों में भी डर और अस्थिरता का माहौल बन गया है। अबू धाबी में हुए एक हवाई हमले के मलबे से दो लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। वहीं तुर्की ने दावा किया है कि उसने अपनी सीमा के पास एक ईरानी मिसाइल को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। पहले से ही तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है और कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका जताई जा रही है।
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