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    जमीन का दाखिल-खारिज न होने पर फूटा युवक का गुस्सा: इंसाफ के लिए मोबाइल टावर पर चढ़ा, इलाके में हाईवोल्टेज ड्रामा शुरू

    हजारीबाग | झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र के बानादाग गांव में शुक्रवार को उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी पुश्तैनी जमीन के विवाद और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) न होने से क्षुब्ध एक युवक 85 फीट ऊंचे एयरटेल के मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर की ऊंचाई पर बैठकर युवक ने अंचल कार्यालय (अंमदर) के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और भू-माफियाओं से मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाते हुए इंसाफ की गुहार लगाई।

    रिश्वतखोरी और गलत जमाबंदी का लगाया गंभीर आरोप

    टावर पर चढ़े युवक का आरोप है कि अंचल कार्यालय के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के चलते उसकी मिल्कियत वाली जमीन की जमाबंदी किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई है। पीड़ित का कहना है कि वह अपनी ही जमीन का हक वापस पाने के लिए पिछले लंबे समय से ब्लॉक और अंचल कार्यालय के चक्कर काट-काट कर थक चुका था, लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी। अपनी ही जमीन से बेदखल होने के सदमे और प्रशासनिक बेरुखी से तंग आकर उसने आत्मघाती कदम उठाने का फैसला किया।

    सीओ को मौके पर बुलाने की जिद और पुलिस की मशक्कत

    मोबाइल टावर के शीर्ष पर पहुंचे युवक ने साफ कर दिया कि जब तक अंचल अधिकारी (सीओ) खुद मौके पर आकर उसकी समस्या का तुरंत निपटारा नहीं करते, वह नीचे नहीं उतरेगा। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की भनक लगते ही कटकमदाग थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी दलबल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों और पुलिस कर्मियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से युवक को काफी देर तक ढांढस बंधाया और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा देकर नीचे उतरने के लिए राजी करने का प्रयास किया।

    हाईवे पर लगा लंबा जाम और राजस्व विभाग पर उठे सवाल

    इस अजीबोगरीब वाकये की खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई, जिससे तमाशबीनों और ग्रामीणों की भारी भीड़ टावर के नीचे जमा हो गई। लोगों की भारी मौजूदगी के कारण स्थानीय सड़क पर वाहनों का चक्का जाम हो गया, जिसे सुचारू कराने में पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने भी अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर रोष व्यक्त किया। लोगों का कहना है कि दाखिल-खारिज की कछुआ चाल और राजस्व विभाग की लेट-लतीफी के कारण आम जनता त्रस्त है और यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर जनसुनवाई हो, तो किसी को अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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