मंडला : दुर्गा मां की मूर्ति स्थापना को लेकर आदिवासी समाज व ओबीसी समाज में शुक्रवार को विवाद की स्थिति बन गई है. आदिवासी समाज का दावा है कि वे सैकड़ों वर्षों से इस स्थान पर खेरमाई माता की पूजा करते आरहे हैं. वहीं ओबीसी समाज का कहना है कि हम लोग भी पिछले सैकड़ो वर्षों से देवी पूजा अर्चना करते आ रहे हैं, जिसमें आदिवसी समाज भी सहभागी रहा है, अब अचानक आदिवासी वर्ग के कुछ लोग ना जाने क्यों इसे लेकर विवाद कर रहें. इस मंदिर को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है, जिसके बाद प्रशासन ने मंदिर पर स्टे लगा दिया था.
आदिवासी समाज साथ करता रहा है पूजा, फिर विरोध क्यों?
आदिवासी समाज के जालम सिंह उईके ने आरोप लगाते हुए कहा, '' जब प्रशासन ने रोक लगाई थी तो फिर पुलिस और राजस्व विभाग की मौजूदगी में मूर्ति स्थापना कैसे कर दी गई? मूर्ति को वहां से हटाया जाए. वहीं, ओबीसी समाज व ग्राम पंचायत के उपसरपंच अश्विन बाजपेयी ने कहा, '' हम भी पिछले कई वर्षों से इसी स्थान पर पूजा अर्चना करतें आ रहे हैं. आदिवासी समाज भी हमारे साथ पूजा अर्चना में हमेशा साथ रहा है. अब भी सभी की सहमति से मूर्ति की स्थापना की गई है लेकिन पता नहीं कौन लोग हमारी मूर्ति का विरोध कर रहे हैं.''
उन्होंने आगे कहा, '' हम अपेक्षा करतें हैं कि जैसे हम किसी के धार्मिक कार्यों में अड़ंगा नहीं अड़ाते, ठीक वैसे ही कुछ लोगों को हमारे देव स्थान पर अड़ंगा नहीं अड़ाना चाहिए. हम लोग इतने वर्षों से एक साथ रहते आए हैं. कभी कोई समस्या नहीं आई लेकिन इस बार मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद किया जा रहा है, जो सही नहीं है.
मंदिर के पास धारा 144 लागू
वहीं, बढ़ता विवाद देख जिला प्रशासन ने उक्त देव स्थान को अपने कब्जे में ले लिया है और दोनों पक्षों को समझाने व विवाद शांत कराने की कोशिश में जुटा रहा, लेकिन दोनों पक्ष अपनी अपनी बातों पर अड़े रहे. परिणाम स्वरूप प्रशासन ने मंदिर परिसर के पास धारा 144 लागू कर मंदिर को सील कर दिया और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. इस मामले को लेकर अपर कलेक्टर राजेंद्र सिंह ने बताया, '' पुराना मंदिर था उसको जीर्णोद्धार करके नया मंदिर पूरे गांव के सहयोग से बनाया गया था. अचानक सूचना मिली कि मंदिर में दुर्गा मां की मूर्ति स्थापित कर दी गई है. दोनों पक्षों से बात की जा रही है और सामंजस्य बिठाने का प्रयास किया जा रहा है.
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार वर्मा ने कहा, '' गांव के लोगों में आपस में ही सहमति बनी थी कि पुराना मंदिर था. जैसा कि एडीएम साहब ने बताया गांव के समस्त लोगों ने चंदा करके श्रमदान करके निर्माण किया था लेकिन एक पक्ष के द्वारा मूर्ति रख ली गई दूसरे पक्ष ने विरोध करना शुरू कर दिया.


