More
    Homeदुनियाट्रंप प्रशासन ने WHO को घेरा, समय पर अलर्ट न देने का...

    ट्रंप प्रशासन ने WHO को घेरा, समय पर अलर्ट न देने का आरोप

    वाशिंगटन। सेंट्रल अफ्रीका में तेजी से पैर पसार रहे इबोला के प्रकोप को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने बड़े पैमाने पर वित्तीय और स्वास्थ्य सहायता देने का ऐलान किया है। हालांकि, इस मदद के साथ ही अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि डब्ल्यूएचओ ने इस बीमारी को लेकर वैश्विक चेतावनी जारी करने में बहुत देर की, जिसकी वजह से प्रभावित इलाकों में समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए जा सके और कीमती समय बर्बाद हो गया। अमेरिका पहले ही इस संकट से निपटने के लिए लगभग 23 मिलियन डॉलर (करीब 1.9 अरब रुपये) की मानवीय सहायता देने की घोषणा कर चुका है और अब वह एक और बड़ा राहत पैकेज तैयार कर रहा है।

    प्रभावित क्षेत्रों में बनाए जाएंगे 50 उपचार केंद्र

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अब इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह नई वित्तीय सहायता सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। इस भारी-भरकम बजट का इस्तेमाल इबोला प्रभावित इलाकों में लगभग 50 विशेष उपचार केंद्र और क्लीनिक बनाने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही वहां बड़ी संख्या में मेडिकल स्टाफ और जरूरी दवाएं भेजी जा रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि इबोला का यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के एक बेहद दूरदराज और आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे इलाके में फैला है। इस वजह से वहां मरीजों की पहचान करना, राहत सामग्री पहुंचाना और डॉक्टरों की टीमों को तैनात करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

    डब्ल्यूएचओ की देरी पर जताई कड़ी नाराजगी

    एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि इस संकट से निपटने में हमारी तरफ से थोड़ी देरी इसलिए हुई क्योंकि डब्ल्यूएचओ ने खुद इस पर कदम उठाने में सुस्ती दिखाई। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने 15 मई को सार्वजनिक रूप से इस इबोला प्रकोप की पुष्टि की थी, जिसके तुरंत बाद अमेरिका ने अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयां सक्रिय कर दीं। इस अभियान में अमेरिका का सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC), स्टेट डिपार्टमेंट और कई अन्य मानवीय एजेंसियां शामिल हैं। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने इस महामारी से निपटने के लिए 24 घंटे काम करने वाली एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है, जिसमें साल 2014 और 2018 के इबोला संकट का अनुभव रखने वाले अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है।

    एक अमेरिकी नागरिक संक्रमित, यात्रा पर सख्त प्रतिबंध

    अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वहां चलाए जा रहे निकासी अभियान (इवैकुएशन मिशन) से जुड़े लोगों में से अब तक एक व्यक्ति इबोला वायरस से संक्रमित (पॉजिटिव) पाया गया है, जबकि कई अन्य संदिग्धों को कड़ी निगरानी में रखा गया है। संक्रमण को अमेरिका में फैलने से रोकने के लिए सीडीसी (CDC) के 'टाइटल 42' आदेश के तहत बेहद सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी ऐसा विदेशी नागरिक जो पिछले 21 दिनों के भीतर कांगो (DRC), युगांडा या दक्षिण सूडान की यात्रा कर चुका है, उसे अमेरिका में एंट्री नहीं दी जाएगी। हालांकि, खेल प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि कांगो की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को आगामी फीफा वर्ल्ड कप में खेलने की अनुमति मिल जाएगी, क्योंकि उसके खिलाड़ी पहले से ही यूरोप में ट्रेनिंग कर रहे हैं और वे इस 21 दिन वाले प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते हैं।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here