वॉशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी एंथ्रोपिक ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने सबसे नए और बेहद शक्तिशाली एआई मॉडल्स—फेबल 5 (Fable 5) और मायथोस 5 (Mythos 5)—को अस्थाई रूप से ऑफलाइन (बंद) कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह कदम वर्तमान ट्रंप प्रशासन के उस हालिया आदेश का पालन करने के लिए उठाया गया है, जिसका मकसद विदेशी नागरिकों और बाहरी तत्वों को इन अत्याधुनिक एआई मॉडलों का इस्तेमाल करने से रोकना है। हालांकि, अचानक उठाए गए इस सरकारी कदम को लेकर एंथ्रोपिक प्रबंधन ने गहरी नाराजगी और असहमति भी जाहिर की है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल एआई तकनीकों के निर्यात और पहुंच को सीमित करने की दिशा में अमेरिकी सरकार द्वारा उठाया गया यह अब तक का सबसे सख्त और बड़ा कदम है। दिलचस्प बात यह है कि एंथ्रोपिक ने इसी हफ्ते अपने 'फेबल 5' मॉडल को वैश्विक बाजार में उतारा था, जो कि कंपनी के ही एक अन्य महा-उन्नत मॉडल 'मायथोस 5' का थोड़ा सीमित वर्जन है। साइबर सिक्योरिटी और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए मायथोस 5 की पहुंच को कंपनी ने पहले से ही काफी गोपनीय और सीमित रखा हुआ था।
बिना स्पष्ट कारणों के कार्रवाई: पारदर्शिता पर उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर एंथ्रोपिक ने एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी करते हुए सरकार के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी का कहना है कि उसे शुक्रवार दोपहर को वाशिंगटन से यह सरकारी गाइडलाइन प्राप्त हुई, लेकिन इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उन पुख्ता और तकनीकी कारणों का कोई साफ जिक्र नहीं है, जिनके आधार पर यह रोक लगाई गई है।
"हम इस बात का पूरा समर्थन करते हैं कि सरकार के पास असुरक्षित और जोखिम भरे एआई मॉडल्स की लॉन्चिंग को रोकने का वैधानिक अधिकार होना चाहिए। लेकिन यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष, स्पष्ट और पूरी तरह से तकनीकी तथ्यों व वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। वर्तमान में की गई यह अचानक कार्रवाई इन बुनियादी सिद्धांतों से मेल नहीं खाती।"
कंपनी ने इस पूरे वाकये को एक बड़ी गलतफहमी करार दिया है और उम्मीद जताई है कि वे जल्द ही सरकार के सामने अपनी तकनीक का सही पक्ष रखकर इन मॉडल्स को दोबारा ऑनलाइन व उपलब्ध करा देंगे।
ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश (Executive Order) का असर
यह बड़ी कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा करीब 10 दिन पहले हस्ताक्षरित किए गए एक कड़े कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) के बाद देखने को मिली है। इस नए आदेश के तहत अमेरिकी संघीय सरकार को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी अत्याधुनिक एआई सिस्टम से होने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की गहन समीक्षा के लिए एक कड़ा सुरक्षा ढांचा तैयार करे।
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी अत्यधिक एडवांस एआई सॉफ्टवेयर या मॉडल को सार्वजनिक रूप से बाजार में पेश करने से पहले उसके संभावित खतरों का अधिकतम एक महीने तक सरकारी स्तर पर परीक्षण व मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि, इस इवैल्यूएशन प्रोसेस में एआई डेवलपर्स और कंपनियों की हिस्सेदारी को फिलहाल स्वैच्छिक (वॉलंटरी) रखा गया है। इस पूरे मामले पर फिलहाल अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वैश्विक एआई उद्योग पर पड़ेगा दूरगामी प्रभाव
वैश्विक तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका इसी तरह सुपर-एडवांस एआई तकनीकों पर अपने निर्यात नियंत्रण और प्रतिबंधों को और कड़ा करता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय शोध (इंटरनेशनल रिसर्च), वैश्विक तकनीकी सहयोग और दुनिया भर की कंपनियों के बीच जारी एआई रेस (प्रतिस्पर्धा) पर पड़ेगा। इसके विपरीत, इस फैसले के समर्थकों का तर्क है कि साइबर हमलों, डीपफेक और अत्यधिक शक्तिशाली एआई प्रणालियों के संभावित दुरुपयोग व युद्धक इस्तेमाल को रोकने के लिए ऐसे सख्त सुरक्षा कवच और सरकारी नियंत्रण बेहद जरूरी हैं।


