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    CM के साथ उद्धव-राज ठाकरे की मुलाकात, महाराष्ट्र की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा

    मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में चल रही खींचतान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे का एक मंच पर आना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।

    गुरुवार को दादर स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर सभागृह में मराठी कार्टून कला पर आधारित पुस्तक 'महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा' के विमोचन समारोह में ये तीनों प्रमुख नेता एक साथ नजर आए। कार्यक्रम से पहले तीनों के बीच बंद कमरे में हुई गुप्त बैठक ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है, हालांकि इस बातचीत का आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है।

    फडणवीस का तंज और उद्धव की प्रतिक्रिया

    समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मजाकिया अंदाज में उद्धव ठाकरे पर तंज कसा और कहा कि उद्धव ने जब भी फोन किया, वे मिलने पहुंचे, लेकिन उसके बाद उन्हें दोबारा कभी नहीं बुलाया गया। इसके साथ ही फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद समाजहित के मुद्दों पर सबको एकजुट होने की पुरानी परंपरा रही है।

    पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि व्यंग्यचित्र समाज और राजनीति की विसंगतियों को बेनकाब करने का एक सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने इस समृद्ध कला को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने और इसके विकास के लिए एक विशेष समिति गठित करने की वकालत की।

    राज ठाकरे ने परिवार की विरासत को किया याद

    मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने इस पुस्तक के संकलन को एक कठिन कार्य बताते हुए अपने परिवार की कलात्मक पृष्ठभूमि को याद किया। उन्होंने कहा कि उनका सौभाग्य है कि उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहां कला का विशेष स्थान था; उनके पिता और चाचा (बाल ठाकरे) 'मार्मिक' पत्रिका के लिए कार्टून बनाते थे, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने भी यह कला सीखी। राज ठाकरे ने देश में चित्रकारों और व्यंग्यचित्रकारों को उचित सम्मान न मिलने पर चिंता जताई।

    मराठी कार्टून कला के इतिहास का अनूठा संकलन

    सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने 'महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा' पुस्तक के प्रकाशन और इसमें मराठी के प्रसिद्ध व्यंग्यचित्रकारों के योगदान को सराहनीय बताया। 'ग्रंथाली पब्लिकेशन्स' द्वारा प्रकाशित और कार्टूनिस्ट प्रशांत कुलकर्णी द्वारा संपादित इस पुस्तक में मराठी कार्टून कला के इतिहास, उसके विकास और वसंत सरवटे जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया गया है।

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