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    नकटी गांव मुद्दे पर विधानसभा में बवाल, स्थगन प्रस्ताव नामंजूर होने पर विपक्ष का वॉकआउट जैसे हालात

    रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में भारी राजनीतिक गरमागरमी और गतिरोध देखने को मिला। राजधानी रायपुर के पास नकटी गांव में हाल ही में की गई प्रशासनिक बेदखली की कार्रवाई को लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन में काम रोको (स्थगन) प्रस्ताव पेश किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस विषय पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए स्थगन की लिखित सूचना दी और इस संवेदनशील मामले पर सदन की बाकी कार्यवाही रोककर तुरंत विशेष चर्चा कराने की मांग की। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए विपक्ष के इस स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर (अस्वीकार) कर दिया, जिसके तुरंत बाद कांग्रेस के तमाम विधायक भड़क गए और उन्होंने सदन के भीतर जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया।

    85 गरीब परिवारों को बेघर करना असंवैधानिक और अमानवीय: कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

    नकटी गांव के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को चौतरफा घेरते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-कानूनी, असंवैधानिक और अमानवीय करार दिया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के इशारे पर स्थानीय प्रशासन ने गरीब और लाचार परिवारों के साथ घोर अन्याय किया है। विपक्ष का दावा है कि भारी बारिश के इस मौसम में अचानक की गई बुलडोजर कार्रवाई के कारण 85 निर्दोष परिवारों के आशियाने (मकान) मिट्टी में मिला दिए गए, जिससे वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कांग्रेस ने सख्त लहजे में कहा कि मानसून के ठीक बीच में इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई करना संवेदनशीलता की सभी सीमाओं को लांघता है, जिसने लोगों के जीवन और आजीविका के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने मांग की कि इस दमनकारी नीति के लिए सरकार अपनी जवाबदेही तय करे और प्रभावित लोगों को तुरंत मुआवजा व उचित पुनर्वास की व्यवस्था उपलब्ध कराए।

    उमेश पटेल और कवासी लखमा का सवाल: बारिश के मौसम में ही बुलडोजर चलाना क्यों था जरूरी?

    बहस के दौरान अपनी बात रखते हुए पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि ऐसी क्या आपातकालीन स्थिति थी कि इस मूसलाधार बारिश के बीच ही यह कार्रवाई करनी पड़ी? उन्होंने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के और वैध मकानों को भी जमींदोज कर दिया। इसके अलावा, बुलडोजर की अंधाधुंध कार्रवाई के दौरान मलबे में दबकर चार गाय और एक बछिया की भी दर्दनाक मौत हो गई।

    वहीं, पार्टी के वरिष्ठ विधायक कवासी लखमा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि यह जमीन सरकारी थी और इस पर कार्रवाई करना इतना ही जरूरी था, तो प्रशासन चार महीने रुककर ठंड या गर्मी के मौसम में भी यह कदम उठा सकता था। कड़कड़ाती बारिश में गरीबों को बेघर करना किसी भी सभ्य समाज में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का पलटवार: शिकायत के बाद पूरी तरह से कानून सम्मत की गई कार्रवाई

    नकटी गांव के विस्थापन को लेकर सदन में विपक्ष के तीखे हमलों और आरोपों का करारा जवाब देते हुए सूबे के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने सरकार का आधिकारिक पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि नकटी में की गई पूरी प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह से संवैधानिक, पारदर्शी और विधि सम्मत (कानून के दायरे में) थी। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि जिला प्रशासन को नकटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भू-माफियाओं और अवैध कब्जों की पुख्ता शिकायतें मिली थीं, जिसकी प्रारंभिक जांच के बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया और पूर्व नोटिस की तामीली करते हुए ही यह अतिक्रमण हटाया गया है। इसमें किसी भी तरह की अमानवीयता नहीं की गई है।

    प्रस्ताव नामंजूर होते ही गर्भगृह में उतरे कांग्रेसी विधायक, सदन की कार्यवाही में भारी व्यवधान

    जब विधानसभा अध्यक्ष ने राजस्व मंत्री के वक्तव्य और नियमों का हवाला देकर विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया, तो सदन में माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। प्रस्ताव नामंजूर होने से नाराज और असंतुष्ट कांग्रेस के सभी विधायक अपनी-अपनी सीटों से खड़े होकर वेल (सदन के गर्भगृह) में पहुंच गए। विपक्षी विधायकों ने गर्भगृह को घेरकर सरकार विरोधी नारे लगाए और गरीब विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाया। इस भारी हंगामे और शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही को संचालित करने में भारी व्यवधान उत्पन्न हुआ, जिसके चलते आसन को विधानसभा की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा।

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