न्यूयॉर्क। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के हालिया आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि देश का कुल राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है। बीते 10 वर्षों में अमेरिका पर कर्ज का यह बोझ लगभग दोगुना हो चुका है, जो डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन दोनों ही राष्ट्रपतियों के शासनकाल में हुए बेतहाशा सरकारी खर्चों का नतीजा है।
साल 2016 तक अमेरिका पर कर्ज 20 ट्रिलियन डॉलर से कम था। हालांकि महामारी के दौर में दिए गए बड़े राहत पैकेजों, रक्षा बजट में बढ़ोतरी और सार्वजनिक सेवाओं पर हुए खर्च के कारण यह तेजी से बढ़ा। इस भारी कर्ज के कारण अमेरिकी प्रशासन को सिर्फ ब्याज चुकाने के लिए ही रोजाना अरबों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।
आम नागरिकों और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव
बढ़ते कर्ज के इस जाल का असर अब अमेरिकी जनजीवन और बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है:
ब्याज दरों में इजाफा: सरकार द्वारा बाजार से बड़ा कर्ज उठाने के कारण ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे आम लोगों के लिए होम लोन और कार लोन काफी महंगे हो गए हैं।
महंगाई की मार: भारी बजटीय घाटे के कारण अर्थव्यवस्था में तरलता बनी रहती है, जिससे दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें और जीवन-यापन का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
सरकारी योजनाओं के बजट में कटौती: टैक्स का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पुराने कर्ज का ब्याज भरने में चला जाता है, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे जरूरी क्षेत्रों के लिए फंड की कमी होने लगी है।
व्यापारिक गतिविधियों में सुस्ती: महंगे कर्ज के चलते कंपनियों के लिए नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करना कठिन हो गया है, जिसका सीधा असर रोजगार और वेतन वृद्धि पर पड़ रहा है।


