चंडीगढ़। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने पूरे राज्य में उचित मूल्य की दुकानों यानी राशन डिपो के विशेष भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ने का निर्देश दिया है। मुख्यालय द्वारा जारी सख्त आदेशों के मुताबिक, सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों, सहायक अधिकारियों और निरीक्षकों को आगामी चार दिनों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों के सभी राशन डिपो के रिकॉर्ड की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस सघन अभियान की शुरुआत शुक्रवार से होने जा रही है। वर्तमान में प्रदेश भर में लगभग 9081 राशन डिपो संचालित हैं, जिनमें से 9060 को पोर्टल पर मैप किया जा चुका है, जबकि अकेले मुख्य जिले में 656 डिपो के माध्यम से करीब 4.72 लाख लाभार्थी राशन प्राप्त कर रहे हैं।
डिपो की स्थिति का आकलन और फैमिली आईडी से मिलान
इस विशेष अभियान के तहत हर एक उचित मूल्य की दुकान की जमीनी सच्चाई और मौजूदा स्थिति का बारीकी से आकलन किया जाएगा। जांच टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि रिकॉर्ड में दर्ज डिपो वास्तव में चालू है, या फिर उसे रद्द, निलंबित या स्वेच्छा से वापस (सरेंडर) किया जा चुका है। यदि डिजिटल पोर्टल और मौके की स्थिति में कोई भी भिन्नता मिलती है, तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा। इसके साथ ही, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने डिपो संचालकों की परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) यानी फैमिली आईडी और उनके परिजनों के पूरे विवरण का मिलान सरकारी आंकड़ों से करने का फैसला किया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
चार कड़े चरणों में पूरी होगी डेटा शुद्धिकरण की प्रक्रिया
प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी कवायद को पारदर्शी बनाने के लिए चार चरणों वाली एक विशेष कार्यप्रणाली तैयार की गई है। सबसे पहले क्षेत्रीय खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक (IFS) अपने इलाके के डिपो का मौके पर जाकर मुआयना करेंगे और अपनी रिपोर्ट सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (AFSO) को सौंपेंगे। इसके बाद एएफएसओ उस रिपोर्ट की समीक्षा कर अपनी टिप्पणियों के साथ इसे जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) के पास भेजेंगे। जिला नियंत्रक द्वारा अंतिम जांच के बाद ही डेटा को स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा। स्वीकृत रिकॉर्ड को पूरी तरह शुद्ध मान लिया जाएगा, जबकि त्रुटि वाले मामलों को दोबारा जांच के लिए वापस भेज दिया जाएगा।
राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की कवायद
शीर्ष अधिकारियों ने इस पूरे सत्यापन कार्य को शीर्ष प्राथमिकता पर रखते हुए तय समय सीमा के भीतर काम निपटाने की हिदायत दी है। विभाग का मुख्य उद्देश्य सरकारी पोर्टल पर दर्ज राशन डिपो की जानकारियों को शत-प्रतिशत सटीक, प्रमाणित और अद्यतन (अपडेट) करना है। सरकार का मानना है कि इस अभियान से जो प्रामाणिक आंकड़े प्राप्त होंगे, उनकी मदद से भविष्य में जनकल्याणकारी नीतियां बनाने, योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और त्वरित प्रशासनिक फैसले लेने में बहुत मदद मिलेगी, जिससे राशन वितरण प्रणाली में कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।


