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    पैक्स एवं डेयरी समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को घर-घर मिलेगी बैंकिंग सुविधा

    जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण आबादी को उनके घर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए सहकारिता विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी पहल की है। सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) डॉ. समित शर्मा ने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत अब राज्य की ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) और प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों के जरिए अत्याधुनिक फिनटेक (फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी) आधारित 'डोर-स्टेप बैंकिंग' सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब गांव के लोगों को बैंकिंग से जुड़े कामों के लिए दूर शहरों या बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि बैंक खुद उनके दरवाजे तक पहुंचेगा।

    मार्च 2027 तक 12 हजार डेयरी समितियां बनेंगी 'बैंक मित्र'

    डॉ. समित शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपैक्स बैंक) के अधिकारियों की 'टू-डू लिस्ट' (कार्ययोजना) की समीक्षा करते हुए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य की सभी सक्रिय प्राथमिक डेयरी समितियों को 'बैंक मित्र' बनाया जाए और उन्हें माइक्रो एटीएम (Micro ATM) की मशीनें दी जाएं। इस योजना के तहत 30 सितंबर 2026 तक 5,000 सहकारी समितियों को और 31 मार्च 2027 तक राज्य की सभी सक्रिय 12,000 प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को बैंक मित्र बनाकर माइक्रो एटीएम से लैस कर दिया जाएगा।

    नाबार्ड के सहयोग से मिलेंगे माइक्रो एटीएम, घर बैठे होंगी ये सुविधाएं

    शासन सचिव ने जानकारी दी कि पैक्स और प्राथमिक डेयरी समितियों को ये माइक्रो एटीएम मशीनें नाबार्ड (NABARD) की वित्तीय सहायता से दी जा रही हैं। इन पोर्टेबल माइक्रो एटीएम मशीनों की मदद से ग्रामीण अपने खातों का बैलेंस जान सकेंगे, पैसों का लेन-देन (जमा और निकासी) कर सकेंगे, अपनी लोन (ऋण) की राशि ले सकेंगे और साथ ही लोन की किस्तें भी जमा करा सकेंगे। आपको बता दें कि अब तक राज्य में लगभग 2,700 पैक्स और बैंक मित्र के रूप में काम कर रहीं 557 प्राथमिक डेयरी समितियों को ये मशीनें बांटी जा चुकी हैं।

    पोर्टल के जरिए घर पर ही खुलेंगे खाते, समितियों को भी होगी कमाई

    सहकारी बैंकों द्वारा अपने एफआईजी (FIG) पोर्टल पर एक विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके जरिए पैक्स और डेयरी समितियों के व्यवस्थापक खुद ग्रामीणों के घर या उनके कार्यस्थल (जैसे खेत या डेयरी बूथ) पर जाकर सीधे उनके नए बैंक खाते खोल सकेंगे और उनकी बचत का पैसा जमा कर सकेंगे। इस व्यवस्था से जहां ग्रामीणों को घर के पास ही सुरक्षित बैंकिंग मिलेगी, वहीं सहकारी बैंकों के पास पैसा जमा होने से उनकी ग्रामीणों को लोन देने की क्षमता भी बढ़ेगी। खास बात यह है कि इस जमा संग्रहण (कलेक्शन) के बदले पैक्स और डेयरी समितियों को कमीशन मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी में भी इजाफा होगा।

    हर ग्राम पंचायत में पैक्स बनाने का बड़ा लक्ष्य

    डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य सहकारी बैंक द्वारा 7 मई को आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला के साथ इस पूरे अभियान की नींव रखी गई थी। इसके बाद अब राजस्थान के हर जिले में केंद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा जिला स्तरीय कार्यशालाएं कर इस काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में राजस्थान के भीतर कुल 11,070 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 9,500 से अधिक ग्राम पंचायतों में पैक्स का गठन पहले ही किया जा चुका है। राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक पैक्स स्थापित करने का है।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा एक नया और मजबूत आधार

    शासन सचिव डॉ. समित शर्मा के अनुसार, सहकारिता विभाग की यह अनोखी पहल ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इन्क्लूजन) को एक नई रफ़्तार देगी। इससे गांव की सहकारी संस्थाएं सिर्फ नाम की समितियां न रहकर 'बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों' (मल्टी-परपज सर्विस सेंटर्स) के रूप में विकसित होंगी। इस बड़े बदलाव से न केवल राजस्थान के सहकारिता आंदोलन को एक नई ताकत मिलेगी, बल्कि गांवों की आर्थिक स्थिति और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक बेहद मजबूत और नया आधार मिलेगा।

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