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    उच्च शिक्षा में बड़ा कदम: आगरा विश्वविद्यालय ने UGC को भेजा ऑनलाइन कोर्स का प्रस्ताव

    आगरा। यदि आप वर्तमान में कहीं नौकरी कर रहे हैं या किसी व्यवसाय से जुड़े हैं और अपने करियर को नई ऊंचाई देने के लिए घर बैठे मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) या मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) जैसी उच्च डिग्रियां हासिल करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (DBRAU) ने विद्यार्थियों और कामकाजी प्रोफेशनल्स की सुविधा के लिए 9 महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों को पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने की एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसका विस्तृत प्रस्ताव नई दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को भेजा जा चुका है। यूजीसी से अंतिम हरी झंडी मिलते ही इन सभी 9 कोर्सों में ऑनलाइन दाखिले और पढ़ाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

    समय की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ने वालों को मिलेगा दूसरा मौका

    अक्सर देखा जाता है कि बहुत से युवा और कामकाजी लोग अपनी उच्च शिक्षा पूरी करना चाहते हैं और कोई बड़ी डिग्री हासिल करने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अपनी नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या व्यापारिक व्यस्तताओं के चलते वे नियमित रूप से कॉलेज या संस्थान नहीं जा पाते। समय के इसी अभाव को देखते हुए विश्वविद्यालय ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का फैसला किया है। विवि द्वारा पहले चरण में जिन 9 मुख्य कोर्सों को ऑनलाइन मोड में बदलने की तैयारी की गई है, उनकी सूची इस प्रकार है:

    • अंडरग्रेजुएट (UG) कोर्स: बीकॉम (B.Com), बीबीए (BBA), और बीसीए (BCA)

    • पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स: एमकॉम (M.Com), एमबीए (MBA), एमसीए (MCA), एमएसडब्ल्यू (MSW), समाजशास्त्र (एमए सोशियोलॉजी) और एमबीए इन ट्रैवल एंड टूरिज्म मैनेजमेंट।

    अगले महीने तक यूजीसी से मंजूरी मिलने की उम्मीद, इसी सत्र से शुरू होगी पढ़ाई

    विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्रबंधन को पूरी उम्मीद है कि इन सभी पाठ्यक्रमों को इसी चालू शैक्षणिक वर्ष से ही ऑनलाइन मोड में शुरू कर दिया जाएगा। 'सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग एंड ऑनलाइन एजुकेशन' के निदेशक डॉ. शरद कुमार उपाध्याय ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रथम चरण के अंतर्गत इन 9 विशिष्ट पाठ्यक्रमों को ऑनलाइन चलाने की वैधानिक अनुमति यूजीसी से मांगी गई है।

    प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारियों को देखते हुए संभावना है कि अगले माह तक आयोग से इसकी आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी। गौरतलब है कि ये सभी 9 कोर्स वर्तमान में विवि के मुख्य परिसर (आवासीय संस्थानों) में नियमित रूप से सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।

    यूजीसी की हरी झंडी के बाद तय होंगी सीटें और फीस का ढांचा

    विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए कुल कितनी सीटें निर्धारित की जाएंगी और इनका फीस स्ट्रक्चर (शुल्क) क्या होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, शुरुआत में व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए विश्वविद्यालय अपने अनुभवी और पुराने एसोसिएट प्रोफेसरों व शिक्षकों के माध्यम से ही ऑनलाइन कक्षाएं और व्याख्यान आयोजित करवाएगा।

    इसके बाद, छात्र-संख्या और आवश्यकता के आधार पर नए गेस्ट फैकल्टी या विशेष ऑनलाइन ट्यूटर्स की तैनाती पर विचार किया जाएगा। यूजीसी से औपचारिक गाइडलाइन और अनुमति पत्र मिलने के तत्काल बाद विवि की अकादमिक काउंसिल सीटों की संख्या और फीस का पूरा मानक तय कर वेबसाइट पर सार्वजनिक कर देगी।

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