मुंबई। सोमवार को बाजार में आई मामूली रिकवरी के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर वैश्विक स्तर के भारी मैक्रो दबाव के आगे लड़खड़ाते हुए नजर आए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उछलकर 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचने, अमेरिकी दस-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में लगातार वृद्धि होने तथा इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीतिगत फैसलों से पहले निवेशकों द्वारा बरती जा रही अत्यधिक सतर्कता के कारण घरेलू बाजार गैप-डाउन के साथ खुले। शुरुआती कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 377.47 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,229.20 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 76.50 अंक या 0.34 प्रतिशत लुढ़ककर 22,676.70 के स्तर पर आ गया।
शेयर बाजार में अचानक गिरावट लाने वाले प्रमुख वैश्विक कारण
वैश्विक पटल पर बन रहे प्रतिकूल और अनिश्चित हालात ने भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार पर एक बार फिर गहरा ब्रेक लगा दिया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 114.91 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर जा पहुँचा है, जबकि अन्य क्रूड ऑयल भी 100.85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिका की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का लगभग 4.97 प्रतिशत के पास बना रहना भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए एक बड़ा अल्पकालिक जोखिम बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की उच्च कीमतें और मजबूत अमेरिकी बॉन्ड यील्ड विदेशी संस्थागत निवेशकों को जोखिम से पूरी तरह दूर रहने यानी रिस्क-ऑफ के रुख पर टिके रहने के लिए मजबूर कर रही हैं।
कॉरपोरेट मार्जिन पर पड़ने वाला संभावित असर और विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि कच्चे तेल के दामों में आई यह तेजी देश की तमाम बड़ी कंपनियों की इनपुट लागत और परिवहन खर्च को भारी रूप से बढ़ा देगी, जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ेगा और भारत का कुल आयात बिल भी बढ़ जाएगा। मुद्रा के बढ़ते जोखिम और वैश्विक ब्याज दरों में छाई अनिश्चितता के चलते कंपनियों की आय वृद्धि के प्रभावित होने की पूरी आशंका बनी हुई है। हालांकि, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के बेहतर कॉरपोरेट नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार मिल रहा मजबूत फंड फ्लो विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को संभालने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
बिकवाली की चपेट में आने वाले प्रमुख सेक्टर और दिग्गज शेयर
कारोबार की शुरुआत के साथ ही देश के कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का भारी दबाव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। मेटल, सूचना प्रौद्योगिकी, एफएमसीजी, ऑयल एंड गैस तथा सीमेंट सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर इन्फोसिस, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, आईटीसी, बजाज फिनसर्व, टाइटन, जेएसडब्ल्यू स्टील और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा और वे प्रमुख लूजर्स की सूची में शामिल रहे। इसके विपरीत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, पावर ग्रिड, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी, सन फार्मा, टाटा कंज्यूमर, इंडिगो, लार्सन एंड टुब्रो तथा अदानी पोर्ट्स के शेयर मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार करते हुए दिखाई दिए।
तकनीकी स्तर पर निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस का गणित
तकनीकी चार्ट विश्लेषकों के अनुसार वर्तमान बाजार परिस्थितियों में निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 22,875 से 23,000 अंकों के दायरे में बना हुआ है। यदि सूचकांक इस मजबूत रेजिस्टेंस स्तर को पार कर ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो बाजार में एक नई रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, नीचे की ओर निफ्टी के लिए पहला मुख्य सपोर्ट 22,500 के आसपास है, जिसके टूटने पर 22,250 का दूसरा महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर सामने आता है। इस दूसरे सपोर्ट स्तर से भी नीचे फिसलने की स्थिति में बाजार में बिकवाली की एक और तीव्र लहर आ सकती है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर टिकी हुई है।


