More
    Homeदुनियाईरान-अमेरिका तनाव के बीच क्यों चर्चा में है कतर का अल-उदैद एयरबेस?

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच क्यों चर्चा में है कतर का अल-उदैद एयरबेस?

    दोहा: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। कुछ समय पहले तक ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौतों से ऐसा लग रहा था कि इस अशांत क्षेत्र में परिस्थितियां सुधर रही हैं। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों का आवागमन भी सुचारू रूप से शुरू हो चुका था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों ने राहत की सांस ली थी। लेकिन हाल ही में होर्मुज क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाकर किए गए हमलों ने पूरे परिदृश्य को अचानक पलट दिया है। इन हमलों का शिकार होने वाले जहाजों में कतर का एक जहाज भी शामिल है, जिसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव और तीखी बयानबाजी का नया दौर शुरू हो गया है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को हैरान कर दिया है कि जो कतर दोनों महाशक्तियों के बीच सुलह कराने में जुटा था, वह अचानक इस विवाद के केंद्र में कैसे आ गया?

    तनाव के केंद्र में अल-उदैद एयरबेस

    सामरिक और रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि कतर के निशाने पर आने की सबसे बड़ी वजह वहां स्थित अल-उदैद एयरबेस है। यह सैन्य अड्डा पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना का सबसे विशाल और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ठिकाना है। अल-उदैद में ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर और कंबाइंड एयर ऑपरेशन सेंटर (CAOC) काम करता है, जहां से पूरे खाड़ी और मध्य-पूर्व क्षेत्र की हवाई गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाती है। इस एयरबेस पर हर समय हजारों अमेरिकी सैनिक मुस्तैद रहते हैं और यहां से दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान, टोही ड्रोन और हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमान उड़ान भरते हैं।

    अमेरिका का अभेद्य सामरिक गढ़

    कतर की राजधानी दोहा से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह सैन्य ठिकाना वाशिंगटन के लिए पूरे क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इराक, सीरिया, जॉर्डन, मिस्र और समूचे खाड़ी देशों में अमेरिकी सेना जो भी ऑपरेशन्स चलाती है, उसकी कमान और तालमेल इसी केंद्र से नियंत्रित होता है। इतना ही नहीं, पूर्वी अफ्रीका से लेकर दक्षिण एशिया तक फैले एक व्यापक भूभाग में अमेरिकी हवाई ताकत का संचालन यहीं से किया जाता है। यही कारण है कि ईरान इस ठिकाने को अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। 1996 में खाड़ी युद्ध के बाद बने इस एयरबेस ने 2003 के इराक युद्ध, अफगानिस्तान मिशन और आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाइयों में बेहद निर्णायक भूमिका निभाई है। आज यह बेस अत्याधुनिक पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और आधुनिक रडार प्रणालियों से लैस एक अभेद्य किला बन चुका है।

    कूटनीति पर भारी पड़ता सैन्य ढांचा

    हालांकि, कतर ने हमेशा एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने की पुरजोर कोशिश की है। उसने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों को कई बार चर्चा के मंच पर लाया और युद्धविराम को अमली जामा पहनाने में भी मदद की। लेकिन इन कूटनीतिक प्रयासों के बाद भी ईरान की चिंताएं कम नहीं हुई हैं। तेहरान का मानना है कि उसके खिलाफ किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का मुख्य जरिया कतर की धरती पर बना यही एयरबेस बनेगा। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का विरोध कतर से नहीं, बल्कि उसकी जमीन पर मौजूद उस अमेरिकी सैन्य तंत्र से है जो ईरान की सुरक्षा के लिए एक सीधी चुनौती बना हुआ है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here