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    बीजेपी और चुनाव आयोग के कर्मचारियों के बीच बैठक क्यों? अभी आचार संहिता लागू है

    मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के बयान ने मुंबई के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। राउत ने बीएमसी चुनावों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव परिणामों के बीच जब शुरुआती रुझानों में बीजेपी समर्थित महायुति को बड़ी बढ़त मिलती दिखी, तब राउत ने मीडिया से बात करते हुए वोटिंग पैटर्न और वोटर लिस्ट को लेकर सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला।
    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राउत ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे डरें नहीं, क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति ने बीएमसी चुनावों में बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहर में जो वोटिंग पैटर्न चल रहा है, वह एक गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के नाम, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में भी वोट दिया था, उन इलाकों से गायब हैं जहां शिवसेना (यूबीटी), मनसे या कांग्रेस हैं। ईवीएम मशीन ठीक से काम नहीं करती…चुनाव आयोग हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। कल, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और चुनाव आयोग के कर्मचारियों के बीच एक बैठक हुई, क्यों? आचार संहिता अभी भी लागू है।
    उन्होंने कहा कि वोटिंग प्रतिशत आने से पहले ही एग्जिट पोल आ गए…बीजेपी ने अपनी जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया…हमने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे डरें नहीं…। मतगणना से मिल रहे शुरुआती रुझानों के मुताबिबक बीजेपी-शिवसेना महायुति गठबंधन लगभग 52 वार्डों में आगे चल रहा है, यह शुरुआती डेटा पोस्टल बैलेट की गिनती से मिल रहा है। एसईसी और बीएमसी के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार है। अब तक गिने गए पोस्टल बैलेट के मुताबिक बीजेपी 35 सीटों पर, शिवसेना 17 सीटों पर आगे है।
    वहीं ठाकरे भाइयों के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) 22 सीटों पर आगे बताई जा रही है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अब तक 8 सीटों पर आगे है। शुरुआती गिनती में कांग्रेस 4 सीटों पर आगे थी। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने वोटिंग खत्म होने के बाद कहा था कि 29 नगर निगमों में लगभग 50 प्रतिशत वोटिंग हुई। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मुंबई नगर निगम चुनावों में 52.94 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो 2017 के पिछले चुनावों में 55.53 प्रतिशत से कम है।
    बता दें बीएमसी जिसका सालाना बजट 74,400 करोड़ रुपए से ज्यादा है, उसमें चार साल की देरी के बाद हो रहे चुनावों में 227 सीटों के लिए 1,700 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। मुंबई को छोड़कर, बाकी शहरी निकायों में मल्टी-मेंबर वार्ड हैं। ये 2022 में शिवसेना में फूट के बाद पहले बीएमसी चुनाव थे, जब अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पार्टी के ज्यादातर विधायकों के साथ अलग हो गए और बीजेपी के साथ गठबंधन करके मुख्यमंत्री बने थे।

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