मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से भारी सरगर्मी और हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के युवा विधायक रोहित पवार ने राज्य के स्कूली व उच्च शिक्षा विभाग में एक अत्यंत बड़े और गंभीर घोटाले का बड़ा दावा प्रस्तुत किया है। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट संकेत दिया है कि एक विशेष स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से शिक्षा तंत्र में चल रहे इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया गया है। विधायक का दावा है कि इस पूरे मामले के तथ्य सामने आने के बाद राज्य सरकार के एक कद्दावर और बड़े मंत्री को अपने पद से त्यागपत्र तक देना पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर खुलासा और मंत्री के इस्तीफे का बड़ा दावा
कर्जत-जामखेड से विधायक और शरद पवार के पोते रोहित पवार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत संदेश साझा कर इस राजनीतिक भूचाल की पटकथा लिखी है। यद्यपि उन्होंने प्रारंभिक जानकारी में संबंधित घोटालेबाज अधिकारियों और सत्ताधारी मंत्री के नाम का प्रत्यक्ष खुलासा नहीं किया है, परंतु उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ने के लिए वे मुंबई में एक आपातकालीन संवाददाता सम्मेलन (प्रेस कॉन्फ्रेंस) करने जा रहे हैं। उन्होंने मुंबई स्थित यशवंतराव चव्हाण सेंटर में शाम 4 बजे इस विषय पर मीडिया को संबोधित करने की घोषणा की है।
छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
अपनी भावुक और आक्रामक पोस्ट में रोहित पवार ने राज्य की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां प्रदेश के लाखों मेधावी छात्र दिन-रात अनवरत परिश्रम करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और उनके अभिभावक पेट काटकर अपने बच्चों के सुखद भविष्य के सपने संजोते हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्ट नेता और प्रशासनिक कुप्रबंधन उन सपनों को पूरी तरह चकनाचूर कर देते हैं। उन्होंने दावा किया कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान जुटाए गए साक्ष्य इतने पुख्ता हैं कि सरकार के पास बचाव का कोई मार्ग नहीं बचेगा।
छात्र आंदोलनों में सक्रियता और सरकार पर बढ़ता दबाव
उल्लेखनीय है कि रोहित पवार विगत कुछ समय से युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर अत्यंत मुखर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पुणे में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के विशाल विरोध-प्रदर्शन का सफलतापूर्वक नेतृत्व भी किया था। उस व्यापक आंदोलन में पूरे राज्य से आए हजारों छात्रों के साथ-साथ महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के शीर्ष नेताओं ने भी हिस्सा लिया था, जिसके बाद बैकफुट पर आई राज्य सरकार को छात्रों की जायज मांगों के आगे झुकना पड़ा था। ऐसे में शिक्षा विभाग में नए घोटाले के इस दावे ने सत्तारूढ़ गठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।


