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    अलवर अस्पताल में स्वास्थ्य की नई उड़ान: एफएनएसी केंद्र से कैंसर जांच अब आसान

    राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय अलवर में आधुनिक एफएनएसी सुविधा शुरू, मरीजों को सस्ती व त्वरित जांच की बड़ी राहत

    अलवर। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने सोमवार को राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के पैथोलॉजी विभाग में फाइन निडल एस्पाइरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) केंद्र का उद्घाटन कर कैंसर एवं अन्य रोगों की जांच सेवा का विधिवत शुभारंभ किया।

    वन राज्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जिला अस्पताल में इस आधुनिक तकनीक की शुरुआत से अलवर की गरीब और मध्यम वर्गीय जनता को बड़ी राहत मिलेगी। अब मरीजों को अस्पताल में ही कैंसर एवं विभिन्न प्रकार की गांठों की जांच की सुविधा उपलब्ध होगी और निजी लैब्स पर हजारों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से अलवर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार चिकित्सा तंत्र को मजबूत करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा अपने बजटों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार हेतु कई महत्वपूर्ण सौगातें दी गई हैं। कार्यक्रम के उपरांत वन राज्यमंत्री ने अपने दैनिक पौधारोपण संकल्प के तहत पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

    प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील चौहान ने बताया कि एफएनएसी कैंसर व अन्य रोगों की जांच की एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी पद्धति है। इसमें पतली सुई की सहायता से गांठ से कोशिकाएं निकाली जाती हैं। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का चीरा नहीं लगाया जाता, टांकों की आवश्यकता नहीं होती और मरीज को भर्ती भी नहीं होना पड़ता।

    राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. इन्दु सूद ने कहा कि अस्पताल का लक्ष्य सभी उच्च स्तरीय डायग्नोस्टिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना है और एफएनएसी केंद्र की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    जनता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सुविधा

    पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष मीणा ने बताया कि एफएनएसी एक अत्यंत सरल और प्रभावी जांच पद्धति है। इसके माध्यम से शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाली गांठ—जैसे स्तन, गले, थायराइड या लिम्फ नोड—की जांच बारीक सुई द्वारा की जाती है।

    मरीजों को होने वाले प्रमुख लाभ

    • कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में सटीक पता लगाने में सहायक।

    • किसी भी प्रकार की सर्जरी या चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं।

    • मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं।

    • जांच रिपोर्ट के लिए जयपुर या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त।

    इस अवसर पर पैथोलॉजी विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. नील शर्मा, डॉ. सुमन मीणा, डॉ. शिल्पा छाबड़ा, डॉ. रेनू राठौड़ सहित प्रबुद्धजन एवं चिकित्सालय स्टाफ उपस्थित रहे।

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