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    अलवर दौरा रद्द होने पर सवाल, जनता में बढ़ा असंतोष

    रेल मंत्री के दौरा, कार्यक्रमों के बाद नाराजगी, रेलवे सुविधाओं की मांग तेज

    अलवर। उस समय निराशा और असंतोष का माहौल देखने को मिला जब 15 मई को प्रस्तावित रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का अलवर दौरा रद्द कर दिया गया। उस समय रेलवे की ओर से पेट्रोल और डीजल की कमी को कारण बताते हुए अलवर जंक्शन पुनर्विकास कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया था।

    अब रेल मंत्री द्वारा जालौर, पाली और जोधपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद अलवर के लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। आमजन का कहना है कि दिल्ली से अलवर की दूरी करीब 150 किलोमीटर है, जबकि दिल्ली से जोधपुर की दूरी लगभग 600 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि क्या पेट्रोल-डीजल की कमी केवल अलवर दौरे के समय ही थी।

    रेलवे मांगों पर सवाल, अलवरवासियों में बढ़ी नाराजगी

    अलवर की जनता लंबे समय से रेलवे और केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें कर रही है। इनमें स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस का अलवर जंक्शन पर ठहराव, अलवर-मथुरा रेल मार्ग पर लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन, अलवर-दिल्ली लोकल एवं ईएमयू ट्रेन सेवा और अलवर कैंट रेलवे स्टेशन की स्थापना जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अलवर को बार-बार केवल घोषणाओं और आश्वासनों तक सीमित रखा जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में विकास कार्यों और दौरों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    संघर्ष समिति की प्रतिक्रिया, वास्तविक विकास की मांग

    रेल विकास संघर्ष समिति, अलवर के अध्यक्ष कमल कांत खड़िया ने कहा कि अलवरवासी अब केवल वर्चुअल कार्यक्रम नहीं, बल्कि रेलवे सुविधाओं में वास्तविक सुधार और ठोस विकास कार्य देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांगों को गंभीरता से पूरा किया जाना चाहिए।

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