मिशनसच न्यूज , रैणी। जिले में वन विभाग और पुलिस द्वारा अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लाख दावों के बावजूद अवैध खनन बदस्तूर जारी है। हैरानी की बात यह है कि अब इन अवैध खनन से निकाले गए पत्थरों का इस्तेमाल सरकारी निर्माण कार्यों में भी हो रहा है।
ताजा मामला रैणी से माचाड़ी सड़क मार्ग निर्माण का है, जहां पचास किलोमीटर दूर स्थित सताना गांव से लाए जा रहे अवैध पत्थरों का उपयोग सड़क किनारे बनाई जा रही सुरक्षा दीवारों में किया जा रहा है। यह सड़क माचाड़ी, टहटड़ा और रैणी गांवों से होकर गुजरती है, और निर्माण कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, निर्माण एजेंसी द्वारा अवैध रूप से खनन किए गए पत्थरों को खुलेआम उपयोग में लाया जा रहा है, जबकि जिले का वन विभाग बार-बार यह दावा करता रहा है कि अवैध खनन पूर्ण रूप से बंद हो चुका है।
जब इस मामले में PWD के सहायक अभियंता पंकज सैनी से बात की गई तो उन्होंने कहा, “एजेंसी द्वारा अधिकृत लीज से पत्थर लाया जा रहा है, और निर्माण कार्य उसी से हो रहा है। फिर भी मैं इसकी जांच करवाता हूँ।”
हालांकि, ज़मीनी हकीकत उनके दावे को झुठलाती दिख रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर से सताना गांव से पत्थर लाकर निर्माण स्थल तक पहुंचाए जा रहे हैं, जो न तो किसी वैध चालान के अंतर्गत आते हैं और न ही इन पर किसी प्रकार की निगरानी है।


