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    आरबीएसके से 5 वर्षीय गौरवित को मिला नया जीवन

    निःशुल्क सर्जरी से तीन बच्चों को राहत, जन्मजात बीमारियों के उपचार में बना आरबीएसके सहारा

    खैरथल-तिजारा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) जिले के बच्चों के लिए जीवनदायी साबित हो रहा है। इसी क्रम में खैरथल-तिजारा जिले के 5 वर्षीय गौरवित की जन्मजात बीमारी का लाखों रुपये लागत वाला ऑपरेशन निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पूरी तरह निःशुल्क कराया गया। वहीं कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) एवं कटे तालु (क्लेफ्ट पैलेट) से पीड़ित दो बच्चियों की भी सफल सर्जरी कर उन्हें नया जीवन मिला।

    आरबीएसके निःशुल्क सर्जरी
    आरबीएसके निःशुल्क सर्जरी

    आरबीएसके के तहत गौरवित की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच, परामर्श और सर्जरी कराई गई। उपचार के दौरान आवश्यक जांच, ऑपरेशन, परिवहन सहित सभी अनुमन्य खर्च सरकार द्वारा वहन किए गए, जिससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

    इसी प्रकार जन्म से कटे होंठ और कटे तालु की समस्या से जूझ रही दो बच्चियों की भी निजी विशेषज्ञ अस्पताल में सफल सर्जरी कराई गई। ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। चिकित्सकों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से उनके बोलने, भोजन करने और सामाजिक विकास में भी सकारात्मक सुधार होगा।

    32 प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का होता है निःशुल्क उपचार

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की 32 प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं की जांच एवं उपचार निःशुल्क किया जाता है। इसके अंतर्गत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जन्मे नवजात, आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 0 से 6 वर्ष तक के बच्चे तथा राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है।

    कार्यक्रम में स्वास्थ्य समस्याओं को चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है—

    • जन्मजात विकार: जैसे कटे होंठ एवं तालु, जन्मजात हृदय रोग, क्लब फुट, डाउन सिंड्रोम, जन्मजात मोतियाबिंद, बहरापन आदि।
    • कमी से होने वाली समस्याएं: गंभीर एनीमिया, विटामिन-ए एवं डी की कमी, गंभीर कुपोषण, घेंघा आदि।
    • सामान्य बीमारियां: त्वचा रोग, कान का संक्रमण, दांतों की सड़न, मिर्गी, टीबी, श्वसन संबंधी रोग आदि।
    • विकास संबंधी विलंब एवं दिव्यांगता: दृष्टि व श्रवण दोष, ऑटिज्म, एडीएचडी, सीखने में कठिनाई, बौद्धिक एवं भाषा विकास में विलंब सहित अन्य समस्याएं।

    यदि स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान किसी बच्चे में बीमारी या जन्मजात विकार पाया जाता है तो उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) अथवा संबंधित विशेषज्ञ संस्थान में निःशुल्क जांच, उपचार, आवश्यक सर्जरी और फॉलो-अप सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

    जिला कलेक्टर ने अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की

    जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से गंभीर बीमारियों का समय पर पता लगाकर उनका निःशुल्क उपचार कराया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से योजना का अधिकतम लाभ उठाने और किसी भी पात्र बच्चे को उपचार से वंचित नहीं रहने देने की अपील की।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिन बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थान में सर्जरी या विशेष उपचार की आवश्यकता होती है, उनका पूरा उपचार सरकार द्वारा निःशुल्क कराया जाता है। इसके साथ ही बच्चे एवं अभिभावक के आने-जाने, आवश्यकतानुसार ठहरने तथा उपचार से जुड़े सभी अनुमन्य खर्च भी सरकार वहन करती है।

    स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से आग्रह किया है कि यदि किसी बच्चे में जन्मजात विकार, शारीरिक या मानसिक विकास में देरी अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या दिखाई दे तो निकटतम स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र, आशा कार्यकर्ता या आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम से संपर्क कर समय पर स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं।

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