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    एक युग का अंत: 90 साल तक संयुक्त परिवार की डोर थामे रहे कल्लूमल लख्याणी नहीं रहे

    सुबह तक संभालते रहे ईंट-भट्टे, 50 साल पहले शुरू की थी खाद-बीज की दुकान; तीन दिन पहले पोत बहू के वाइस चेयरमैन बनने पर खुशी से झूम उठे थे

    किशनगढ़बास/मोठूका। किशनगढ़बास क्षेत्र ने रविवार को अपना एक अनमोल रत्न खो दिया। मोठूका के पूर्व सरपंच, उद्योगपति और समाजसेवी कल्लूमल लख्याणी का 90 वर्ष की उम्र में अचानक तबीयत बिगड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही किशनगढ़बास, मोठूका सहित आसपास के क्षेत्र और व्यापार जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

    कल्लूमल लख्याणी का जीवन परिश्रम, सामाजिक सरोकार और पारिवारिक संस्कारों की मिसाल रहा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र से अपने जीवन की शुरुआत करते हुए सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। पूर्व सरपंच के रूप में उन्होंने गांव के विकास में योगदान दिया तो व्यवसाय के क्षेत्र में भी मेहनत और ईमानदारी के दम पर अपनी पहचान कायम की। एक सामान्य ग्रामीण परिवेश से सफल उद्योगपति तक का उनका सफर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहा।

    सात बेटों का परिवार, एक छत और एक साथ रहने की परंपरा

    कल्लूमल लख्याणी की सबसे बड़ी विरासत उनका परिवार रहा। उनके सात पुत्र और एक भाई हैं। विशेष बात यह रही कि इतना बड़ा परिवार आज भी एक ही छत के नीचे मिल-जुलकर रहता है। संयुक्त परिवार की इस परंपरा को बनाए रखने में कल्लूमल लख्याणी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। करीब नौ दशक के जीवन में उन्होंने परिवार को एक सूत्र में बांधे रखा और आपसी प्रेम, सम्मान तथा संस्कारों को प्राथमिकता दी। क्षेत्र में उनका परिवार संयुक्त परिवार की मिसाल के रूप में जाना जाता रहा है।

    उम्र के इस पड़ाव पर भी काम के प्रति समर्पण

    कल्लूमल लख्याणी का काम के प्रति समर्पण उनकी पहचान था। उनके दो ईंट-भट्टे अमन ब्रिक्स और अशोका ब्रिक्स हैं, जिनकी देखभाल उनके छोटे भाई मुरलीधर तथा पुत्र किशन और प्रकाश करते हैं। उम्र के 90वें पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी वे सुबह भट्टों पर जाकर कामकाज की जानकारी लेते और व्यवस्थाओं को देखते थे।

    किशनगढ़बास में खाद-बीज की जिस दुकान की शुरुआत उन्होंने करीब 50 वर्ष पहले की थी, वह आज भी किसानों के बीच भरोसे का नाम है। इसके अलावा किशनगढ़बास में लख्याणी मार्केट सहित कई दुकानें और संपत्तियां हैं, जहां बैंक और अस्पताल जैसी संस्थाएं संचालित हो रही हैं। परिवार के एक पुत्र ने मिष्ठान भंडार का व्यवसाय भी स्थापित किया।

    तीन दिन पहले पोत बहू की जीत पर खुशी से झूम उठे थे

    कल्लूमल लख्याणी की जिंदादिली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निधन से महज तीन दिन पहले वे अपनी पोत बहू कंचन मनीष लख्याणी के नगर पालिका किशनगढ़बास की वाइस चेयरमैन बनने पर बेहद खुश थे। बताया जाता है कि उन्होंने वार्ड में घूम-घूमकर पोत बहू के लिए वोट भी मांगे थे। जीत के बाद परिवार में खुशी का माहौल था और 90 वर्ष की उम्र में भी कल्लूमल लख्याणी खुशी से झूम उठे थे। परिवार के लिए यह खुशी का पल कुछ ही दिनों में गहरे दुख में बदल गया।

    पिता के संस्कारों को आगे बढ़ा रहे परमानंद

    कल्लूमल लख्याणी के चौथे नंबर के पुत्र परमानंद लख्याणी भी सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपने पिता के संस्कारों को आगे बढ़ा रहे हैं। वे वर्तमान में किशनगढ़बास व्यापार महासंघ के अध्यक्ष हैं। सामाजिक क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें जिला एवं उपखंड स्तर पर प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उनके परिवार में एक बेटी चिकित्सक हैं, जबकि दूसरी बेटी निजी बैंक में कार्यरत हैं।

    शाम 5 बजे होगी अंतिम यात्रा

    कल्लूमल लख्याणी की अंतिम यात्रा रविवार शाम 5 बजे उनके निजी निवास से रवाना होगी। अंतिम यात्रा मोठूका स्थित मोक्षधाम पहुंचेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से परिवार, रिश्तेदारों, व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों में गहरा शोक है।

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