याचिका पर जिंदल सॉ लिमिटेड, जिला कलेक्टर व नगर निगम को नोटिस, चार सप्ताह में जवाब तलब
मिशनसच न्यूज, भीलवाड़ा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सेंट्रल जोनल बेंच भोपाल ने भीलवाड़ा में पौधारोपण, गौशाला संचालन, लावारिस पशुओं की समस्या एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। यह आदेश बाबूलाल जाजू द्वारा दायर एक्जीक्यूशन आवेदन संख्या 01/2026 पर पारित किया गया।
मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) एवं माननीय ईश्वर सिंह (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने की। याचिकाकर्ता बाबूलाल जाजू की ओर से अधिवक्ता लोकेन्द्र सिंह कच्छावा ने प्रभावी पैरवी की।
एनजीटी ने वर्ष 2017 में पारित पूर्व आदेशों की जिंदल सॉ लिमिटेड एवं नगर निगम द्वारा पालना नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया है। अधिकरण ने जिला कलेक्टर एवं नगर निगम भीलवाड़ा को निर्देश दिए कि गोशाला को नगर निगम के प्रत्यक्ष प्रबंधन में लेने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ कर आवश्यक अधिसूचना जारी की जाए।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि शहर में खुले घूम रहे लावारिस पशु यातायात बाधा, सड़क दुर्घटनाओं एवं वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहे हैं। ऐसे पशुओं को गोशाला में भेजकर भीलवाड़ा को आवारा पशु मुक्त शहर बनाने हेतु प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
400 बीघा भूमि पर व्यापक वृक्षारोपण के निर्देश
अधिकरण ने आदेश में कहा कि जिंदल सॉ लिमिटेड अपनी सीएसआर गतिविधियों के अंतर्गत गोशाला के प्रशासन एवं रख-रखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। साथ ही कंपनी को सौंपी गई 400 बीघा भूमि एवं गोशाला परिसर में व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे पशुओं को छाया व चारे की समुचित सुविधा उपलब्ध हो सके।
डिकम्पोज़िशन प्लांट बंद होने पर नाराजगी
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर एनजीटी ने नगर निगम की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की। अधिकरण ने कहा कि भीलवाड़ा में क्रय किया गया डिकम्पोज़िशन प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का स्पष्ट उल्लंघन है।एनजीटी ने जिला कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त को संयुक्त समीक्षा कर संयंत्र शीघ्र चालू करने तथा किए गए प्रयासों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
चार सप्ताह में जवाब, छह सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट
एनजीटी ने जिला कलेक्टर, जिंदल सॉ लिमिटेड एवं नगर निगम को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने तथा छह सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
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