साउंड पर सवाल: तेज धमक वाले डीजे से जनस्वास्थ्य और सुरक्षा पर खतरे की आशंका
किशनगढ़ बास। क्षेत्र में धार्मिक शोभायात्राओं और विवाह आयोजनों के दौरान तेज धमक वाली डीजे साउंड गाड़ियों का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है, जो अब आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन अत्यधिक तेज ध्वनि और कंपन वाली डीजे गाड़ियों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है।
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक झांकियों और बारात निकासी में डीजे साउंड गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ी है। अब एक ही आयोजन में 5 से 10 तक डीजे गाड़ियां बुक की जा रही हैं, जिससे ध्वनि स्तर बेहद अधिक हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीजे साउंड दो प्रकार के होते हैं—एक सामान्य ध्वनि वाले और दूसरे अत्यधिक तेज धमक (वाइब्रेशन) वाले। तेज धमक वाले डीजे का प्रभाव इतना अधिक होता है कि आसपास के मकानों में कंपन महसूस होती है और लोग कुछ ही समय में वहां से हटने को मजबूर हो जाते हैं।
विशेषज्ञों और आमजन के अनुसार, इस तरह की तेज ध्वनि और कंपन का असर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। लगातार तेज आवाज से मानसिक तनाव, घबराहट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि तेज कंपन के कारण दुकानों में रखा सामान नीचे गिर जाता है और शीशे तक हिलने लगते हैं। कई बार ग्राहक और दुकानदार असहज महसूस करते हैं, लेकिन धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से जुड़ा मामला होने के कारण खुलकर विरोध नहीं कर पाते।
आमजन ने प्रशासन से मांग की है कि तेज धमक वाली डीजे गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही, शोभायात्रा और बारात निकासी की अनुमति देते समय आयोजकों को इस तरह के साउंड सिस्टम का उपयोग न करने के लिए पाबंद किया जाए।
लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को इस दिशा में सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सके और किसी भी संभावित जनहानि से बचा जा सके।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

