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    खैरथल में रेलवे फाटक बना सबसे बड़ी परेशानी, स्थायी समाधान की मांग तेज

    लंबे समय तक बंद रहने वाला रेलवे फाटक बना मुसीबत, ओवरब्रिज निर्माण की मांग हुई तेज

    खैरथल। शहर को दो भागों में जोड़ने वाला रेलवे फाटक इन दिनों आमजन के लिए सबसे बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। दिल्ली-जयपुर रेल मार्ग पर ट्रेनों की लगातार आवाजाही और रेलवे के रखरखाव कार्यों के दौरान फाटक लंबे समय तक बंद रहने से शहर की यातायात व्यवस्था बार-बार प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ओवरब्रिज अथवा अंडरपास निर्माण की मांग तेज कर दी है।

    शहरवासियों का कहना है कि औसतन हर 20 मिनट में ट्रेन गुजरने के कारण रेलवे फाटक बंद कर दिया जाता है। इससे मुख्य बाजार, अस्पताल, विद्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दैनिक आवागमन पर गंभीर असर पड़ता है। कई बार घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है।

    आपातकालीन सेवाएं भी होती हैं प्रभावित

    स्थानीय नागरिकों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब एम्बुलेंस, स्कूल बसें, दूध, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहन रेलवे फाटक पर जाम में फंस जाते हैं। इससे मरीजों और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा कई बार जान का भी खतरा उत्पन्न हो जाता है।

    वर्षों से मिल रहे आश्वासन, समाधान अब तक नहीं

    शहरवासियों का कहना है कि वर्षों से रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज या वैकल्पिक मार्ग निर्माण के वादे किए जाते रहे हैं। चुनावों के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठता है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी है। इससे लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

    शहरवासियों की प्रमुख मांगें

    • रेलवे फाटक पर बार-बार लगने वाले लंबे जाम का स्थायी समाधान किया जाए।
    • ओवरब्रिज अथवा अंडरपास निर्माण कार्य को प्राथमिकता देकर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
    • स्थायी समाधान होने तक प्रभावी यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि एम्बुलेंस एवं अन्य आपातकालीन सेवाओं को निर्बाध मार्ग मिल सके।
    • रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त कार्ययोजना बनाकर आमजन की परेशानी दूर करें।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खैरथल का रेलवे फाटक केवल एक रेलवे क्रॉसिंग नहीं, बल्कि पूरे शहर की जीवनरेखा है। उनका मानना है कि अब केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध कार्रवाई से ही इस गंभीर समस्या का समाधान संभव है।

    स्थानीय नागरिक सुनील कुमार ने कहा, “जनता को आश्वासन नहीं, सुरक्षित और सुगम आवागमन चाहिए। विकास की पहचान घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर बने पुलों और सुचारु यातायात व्यवस्था से होती है।”

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