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    चने की खरीद नहीं होने से किसान घाटे में, 235 जनप्रतिनिधियों के बावजूद किसानों को राहत नहीं : रामपाल जाट

    किसान महापंचायत ने चने की खरीद पर उठाए सवाल, बोले– समर्थन मूल्य योजना की अवहेलना से किसानों को हो रहा भारी नुकसान

    जयपुर। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने आरोप लगाया है कि राजस्थान में ‘मूल्य समर्थन योजना’ के अंतर्गत चने की दाने-दाने की खरीद नहीं होने से किसान भारी आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 235 जनप्रतिनिधि होने के बावजूद किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है और एक क्विंटल चने पर किसानों को करीब 775 रुपये तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।

    रामपाल जाट ने रविवार को जारी बयान में कहा कि केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में राजस्थान से एक राज्य मंत्री, एक स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और दो मंत्री हैं, वहीं राज्य में मुख्यमंत्री सहित दो उपमुख्यमंत्री और 25 सदस्यीय मंत्रिमंडल कार्यरत है। इसके अलावा लोकसभा और राज्यसभा में भी राजस्थान के कई प्रभावशाली प्रतिनिधि मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद किसानों के हित सुरक्षित नहीं हैं।

    उन्होंने कहा कि किसान महापंचायत की ओर से सभी जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भेजकर किसानों की समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

    राजस्थान में खरीद केंद्रों की स्थिति कमजोर

    रामपाल जाट ने बताया कि वर्ष 2024-25 तक के तीन वर्षों के औसत के अनुसार देश के कुल चना उत्पादन का 78.2 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से आता है। केंद्र सरकार की मार्गदर्शिका के अनुसार नेफेड और एनसीसीएफ को दाने-दाने की सीधी खरीद का दायित्व दिया गया है।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में 46, महाराष्ट्र में 55 और गुजरात में 43 खरीद केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जबकि राजस्थान में अजमेर जिले के किशनगढ़ में केवल एक खरीद केंद्र शुरू किया गया था। वहां भी जिन किसानों का पंजीयन राजफेड में हुआ, उनसे खरीद नहीं की गई।

    उन्होंने बताया कि इस बार खरीद के लिए राज्यों को अलग-अलग लक्ष्य दिए गए थे, जिसमें महाराष्ट्र 8 लाख 19 हजार 882 टन खरीद के साथ आगे चल रहा है। मध्य प्रदेश और गुजरात की स्थिति भी संतोषजनक है, जबकि राजस्थान काफी पीछे है।

    राजस्थान में 261 केंद्रों पर खरीद शून्य

    रामपाल जाट ने कहा कि मध्य प्रदेश में 3,627 खरीद केंद्र संचालित हैं, जबकि राजस्थान का क्षेत्रफल बड़ा होने के बावजूद यहां केवल 773 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से भी 30 अप्रैल तक 261 केंद्रों पर खरीद शून्य दर्ज की गई, यानी ये केंद्र शुरू ही नहीं हुए।

    उन्होंने कहा कि राजस्थान में लगभग 23 लाख टन चना उत्पादन होने के बावजूद डेढ़ लाख टन से भी कम खरीद हो सकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 25 प्रतिशत भी नहीं है। इस कारण किसान मजबूरी में बाजार में औने-पौने दामों पर अपनी उपज बेच रहे हैं।

    पंजीयन प्रक्रिया को बताया अव्यवस्थित

    किसान महापंचायत अध्यक्ष ने कहा कि नेफेड और एनसीसीएफ में पंजीयन लगातार खुले रहते हैं, जबकि राजस्थान की राजफेड में पंजीयन व्यवस्था “चूहा-बिल्ली के खेल” जैसी है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए पंजीयन कराना एवरेस्ट फतह करने जैसा बन गया है।

    उन्होंने बताया कि राजस्थान में खरीद के लिए जनआधार कार्ड को मान्यता दी गई है, जिससे एक परिवार में कई खातेदार होने के बावजूद केवल एक व्यक्ति की उपज खरीदी जा रही है। जबकि नेफेड और एनसीसीएफ में आधार कार्ड आधारित व्यवस्था होने से परिवार के सभी खातेदारों की खरीद संभव हो पाती है।

    रामपाल जाट ने कहा कि किसान पिछले 10 वर्षों से इस व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई मार्गदर्शिका से किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।

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