दुनिया में सबसे भयंकर पाप विश्वासघात, विश्वासघाती को जीवन में कभी क्षमा नहीं मिलती
भीलवाड़ा। जीवन में सखा वहीं होता है जो उसका खास होता है। जिसका विनाश तय है उसके साथ मित्रता नहीं हो सकती। अजर अमर अविनाशी परमात्मा के अलावा हमारा दूसरा कोई मित्र नहीं हो सकता। अविनाशी परमात्मा के साथ हमारी दृढ़ मित्रता व स्नेह होना चाहिए।
सखा भाव सम रहे इसमें कभी विषमता नहीं आती है। सखा भक्ति सर्वोच्च भक्ति होती है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने शुक्रवार को विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में सखा भक्ति की चर्चा करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि परमात्मा ओर हमारा सम्बन्ध जन्म-जन्म का है बाकी सब सम्बन्ध पीछे छूट जाते है। स्वार्थ वाली मित्रता कभी टिकती नहीं है। परमात्मा से मित्रता करो न तो वह मरता है, न बिछुड़ता है ओर न आगे होकर मित्रता तोड़ता है। महात्मा परमात्मा कभी पकड़ते नहीं है ओर पकड़ लेते है तो जन्मो जन्म तक अपना बनाकर रखते है कभी छोड़ते नहीं है।
आचार्यश्री ने कहा कि स्वामी रामचरण महाराज ने सखा भक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा मन व विचार ही हमारा मित्र व शत्रु है ओर वे ही किसी को शत्रु ओर किसी को मित्र बनाता है इसलिए सबसे पहले अपने मन व विचार को मित्र बनाए। परमात्मा से श्रेष्ठ मित्र जगत में नहीं हो सकता। अर्जुन भगवान कृष्ण का सखा ओर भक्त दोनों था। भगवान ने तत्वज्ञान में बताया कि भक्त से भी सखा श्रेष्ठ होता है।
परमात्मा ने अर्जुन को मित्र बनाकर दिव्य ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वह भाग्यशाली होते है जिन्हें परमात्मा की मित्रता प्राप्त होती है। हम परमात्मा को मित्र बनाए वह ठीक है पर परमात्मा हमे मित्र स्वीकार करे तो भाग्यशाली है। गोकुल के ग्वाले इसलिए भाग्यशाली थे कि कृष्ण ने उन्हें अपना मित्र बनाया था। बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो वेदाभ्यास, शास्त्राभ्यास, स्वाध्याय करता है। वाणीजी का वाणी में स्वाध्याय करेंगे तो उसे आत्मसात कर पाएंगे।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि संसार को मित्रता की दृष्टि से देखे। नकारात्मक सोचते तो शत्रुता ओर सकारात्मक सोचने पर मित्रता नजर आती है। हम परमात्मा में माता पिता, गुरू व मित्र को देखते है तो माता पिता, गुरू व मित्र में भी परमात्मा को देखे ओर कभी इनके साथ विश्वासघात नहीं करे। विश्वासघाती जैसे पापी को धरती मां कभी सहन नहीं करती ओर ऐसा व्यक्ति कभी शांति को प्राप्त नहीं कर सकता।
विश्वासघाती को दुनिया में कोई क्षमा नहीं करता। संसार में सबसे भयंकर पाप विश्वासघात होता है। उन्होंने कहा कि मित्र ओर परमात्मा के साथ छल कपट कभी मत करो। मित्र भक्ति में ज्ञान ओर ज्ञान में भगवान है। सच्चा मित्र वहीं है जो अपने साथ को कुमार्ग से सुमार्ग पर ले लाए ओर पतित को पावन बना दे।
आचार्यश्री ने कहा कि धैर्य, धर्म, मित्र ओर नारी की परीक्षा विपतिकाल में ही होती है। संकट में ही पता चलता कौन कितना धैर्यवान ओर धर्मात्मा है। आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया।
प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
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