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    रामपुरा स्कूल विवाद में गरजा PUCL, CJP कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग

    स्कूल की बदहाली पर घिरा प्रशासन, SHO-ACP पर कार्रवाई और निगरानी संबंधी आदेश वापस लेने की उठी मांग

    जयपुर। सांगानेर तहसील के शिवदासपुरा थाना क्षेत्र स्थित रामपुरा उर्फ कन्वरपुरा गांव में सरकारी स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे CJP कार्यकर्ताओं पर कथित हमले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL), राजस्थान ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए हमले के सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    PUCL ने आरोप लगाया कि CJP के करीब 40 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पर हमला किया गया, जिसमें कई कार्यकर्ताओं के घायल होने के साथ वाहनों और मोबाइल फोन को नुकसान पहुंचाने की जानकारी सामने आई है। संगठन ने इस मामले में शिवदासपुरा थाना प्रभारी और संबंधित ACP की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा कथित लापरवाही पाए जाने पर निलंबन सहित कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

    स्कूल की स्थिति देखने पहुंचा था प्रतिनिधिमंडल

    PUCL के अनुसार CJP के स्कूल ठीक करो अभियान के तहत कार्यकर्ता राजस्थान के दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति का जायजा ले रहे हैं। इसी क्रम में 21 अगस्त को CJP सदस्य रेखा शर्मा के निमंत्रण पर करीब 40 सदस्यीय दल रामपुरा उर्फ कन्वरपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंचा था।

    PUCL का दावा है कि विद्यालय भवन की छत करीब 18 महीने से जर्जर है और उसके गिरने का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से स्कूल को एक गौशाला में स्थानांतरित किया गया है। यहां केवल दो कमरों में स्कूल का सामान और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था है, जबकि बच्चों को खुले में पढ़ने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

    संगठन के मुताबिक आसपास मवेशियों की मौजूदगी, मक्खियां, बारिश और तेज धूप जैसी परिस्थितियों के बीच बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या घटकर करीब 25 रह गई है और कई अभिभावकों ने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया है।

    हमले में कई लोगों के घायल होने का दावा

    PUCL ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल संजू वर्मा के बाएं हाथ में फ्रैक्चर तथा दाहिने हाथ में चोट आई। रेखा शर्मा के कंधे पर चोट लगने और उनका मोबाइल फोन छीनकर तोड़ने का आरोप लगाया गया है। अधिवक्ता सलमान को खेतों तक दौड़ाकर पीटे जाने तथा अशुतोष रांका के गले पर प्रहार किए जाने का भी दावा किया गया है।

    संगठन के अनुसार कुल करीब आठ लोगों के घायल होने तथा वाहनों और मोबाइल फोन को क्षतिग्रस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। PUCL ने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल पर हमला अचानक नहीं हुआ, बल्कि पहले से तैयार भीड़ द्वारा किया गया।

    अफवाह फैलाकर भीड़ जुटाने का आरोप

    PUCL के अनुसार ग्रामीणों के बीच यह अफवाह फैलाई गई कि CJP के सदस्य सरकारी स्कूल को तोड़ने के लिए गांव में आए हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और प्रतिनिधिमंडल को कथित रूप से निशाना बनाया गया।

    संगठन ने कहा कि स्कूल की वास्तविक स्थिति देखने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाने वाले नागरिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस तरह की अफवाहें लोकतांत्रिक निगरानी और जवाबदेही की भावना के विपरीत हैं।

    पूर्व सूचना के बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं करने का आरोप

    PUCL ने शिवदासपुरा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि CJP कार्यकर्ताओं ने प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से करीब एक घंटे पहले थाना प्रभारी गौतम डो टासरा को फोन और WhatsApp के जरिए संभावित हमले की आशंका की सूचना दी थी।

    संगठन का आरोप है कि SHO ने कार्यकर्ताओं से स्वयं स्थिति संभालने को कहा और विधानसभा सत्र में व्यस्त होने की बात कही। PUCL के मुताबिक पुलिस हिंसा होने के बाद मौके पर पहुंची। इसी तरह संबंधित ACP को भी संभावित खतरे की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।

    PUCL ने पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और लापरवाही साबित होने पर सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

    स्कूल की बदहाली पर भी उठाए सवाल

    PUCL ने कहा कि अशुतोष रांका, रेखा शर्मा और अन्य कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2025 में भी स्कूल की खराब स्थिति को सामने रखा था और अधिकारियों को पत्र लिखकर भवन की मरम्मत की मांग की थी। संगठन का दावा है कि एक वर्ष बीतने के बावजूद विद्यालय की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    PUCL ने मांग की है कि जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराई जाए और बच्चों को गौशाला अथवा असुरक्षित परिस्थितियों में पढ़ने की मजबूरी से मुक्त कर सुरक्षित एवं सम्मानजनक विद्यालय उपलब्ध कराया जाए।

    स्कूलों में प्रवेश और रिकॉर्डिंग संबंधी आदेश पर भी आपत्ति

    PUCL राजस्थान ने शिक्षा विभाग द्वारा 14 अगस्त 2026 को जारी उस आदेश पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश तथा विद्यार्थियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही गई है।

    PUCL का कहना है कि विद्यार्थियों की निजता और सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन इन प्रावधानों का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों की बदहाली को सार्वजनिक निगरानी से बाहर रखने के लिए नहीं होना चाहिए। संगठन ने नागरिक संगठनों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने तथा सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के अधिकार को बनाए रखने की मांग की है।

    गरीब परिवारों के बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

    PUCL के अनुसार ग्रामीणों ने स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज सकते हैं, लेकिन गरीब परिवार सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकारी विद्यालय की खराब स्थिति का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ता है।

    संगठन ने यह भी कहा कि स्कूल की स्थिति सुधारने के साथ उन बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए, जिन्होंने विद्यालय की बदहाली के कारण पढ़ाई छोड़ दी है।

    PUCL ने रखीं ये प्रमुख मांगें

    PUCL राजस्थान ने सरकार और प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से मांग रखी है कि—

    • CJP प्रतिनिधिमंडल पर हमले के सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
    • शिवदासपुरा SHO और संबंधित ACP की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई एवं निलंबन किया जाए।
    • रामपुरा उर्फ कन्वरपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
    • बच्चों को गौशाला में पढ़ने की मजबूरी से मुक्त कर सुरक्षित विद्यालय उपलब्ध कराया जाए।
    • स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को वापस शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
    • 14 अगस्त 2026 का बाहरी प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश वापस लिया जाए।
    • सरकारी स्कूलों की स्वतंत्र सामाजिक निगरानी और नागरिक संगठनों द्वारा निरीक्षण का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।

    PUCL ने कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करने वाले नागरिक कार्यकर्ताओं पर कथित हमला केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है।

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