छल-कपट और कुटिलता छोड़ भीतर से निर्मल रहने का दिया संदेश, भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
अलवर। दिगम्बर जैन धर्मावलम्बियों के चल रहे दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को शहर के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में उत्तम आर्जव धर्म की पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। विधान, भजन, पूजा-अर्चना और जिनेन्द्र भक्ति के बीच पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा।
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के अवसर पर शहर के विभिन्न दिगम्बर जैन मंदिरों में चल रहे विधान कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। इस दौरान भजनों के साथ श्रद्धालुओं ने नृत्य कर जिनेन्द्र भक्ति की और भगवान के जयकारे लगाए।
अहिंसा स्थल और सूर्य नगर मंदिर में उमड़ा उत्साह
अलवर के कटी घाटी के पास ढाई पैड़ी स्थित श्री दिगम्बर जैन अहिंसा स्थल मंदिर में चल रहे विधान के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। भजनों के बीच श्रद्धालुओं ने नृत्य किया और भगवान आदिनाथ के जयकारे लगाए।
इसी प्रकार सूर्य नगर स्थित श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में भी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्ति गीतों के बीच नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं ने जिनेन्द्र भगवान की आराधना की।
भीतर की निर्मलता को बताया उत्तम आर्जव धर्म
दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन स्कीम नंबर 10 स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन चौबीसी मंदिर में वर्षायोग के लिए ससंघ विराजमान मुनि सौम्य सागर महाराज ने श्रद्धालुओं के साथ धर्म चर्चा की।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति बाहरी रूप से कितना भी स्वच्छ क्यों न रहे, लेकिन जब तक मन और आचरण की निर्मलता नहीं होगी, तब तक आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना कठिन है। उन्होंने श्रद्धालुओं को छल-कपट, कुटिलता और धोखे से दूर रहने का संदेश दिया।
वहीं अहिंसा स्थल पर विराजमान मुनि अभिनन्दन सागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म का अर्थ बताते हुए कहा कि व्यक्ति जैसा बाहर दिखाई देता है, वैसा ही उसका आंतरिक आचरण भी होना चाहिए। उन्होंने किसी के साथ धोखा और कुटिलता नहीं करने की सीख दी।
संतों ने समझाया कि छल और कपट से मनुष्य का जीवन उलझता है, इसलिए सरलता और निष्कपटता को जीवन में अपनाना चाहिए।
सुबह अभिषेक और शांतिधारा, शाम को आरती
हरीश जैन ने बताया कि दिगम्बर जैन मंदिरों में सुबह करीब 6:30 बजे से श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद नित्य नियम पूजन एवं विधान के कार्यक्रम हुए।
दशलक्षण पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की ओर से धार्मिक कार्यों में दान भी किया जा रहा है। शाम के समय विभिन्न मंदिरों में आरती के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें छोटे-छोटे बच्चों ने भी उत्साह के साथ भाग लिया।
19 सितंबर को होगी उत्तम शौच धर्म की पूजा
दशलक्षण पर्व के चौथे दिन 19 सितंबर को उत्तम शौच धर्म की पूजा की जाएगी। इसके लिए जैन मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां जारी हैं। पर्व के चलते जैन समाज के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर लगातार श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है।
मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1
अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क


