पोक्सो कोर्ट का फैसला, 13 साल पांच माह की पीड़िता से दुष्कर्म अपराध मामले में आरोपी दोषसिद्ध
अलवर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशिष्ट न्यायालय पोक्सो नंबर-2 के न्यायाधीश भवानी शंकर पांडिया ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने पीड़िता की उम्र और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पीड़िता को पांच लाख रुपये प्रतिकर दिलाए जाने की भी अनुशंसा की है।
10 जून 2025 को दर्ज हुआ था मामला
विशिष्ट लोक अभियोजक पंकज यादव ने बताया कि पीड़िता की माता ने 10 जून 2025 को पुलिस थाना बड़ौदामेव में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार 9 जून 2025 की रात करीब 2 बजे आरोपी राकेश नाबालिग बालिका को जबरन अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
घटना के बाद नाबालिग बालिका रोती हुई घर के पास रास्ते में मिली। परिजनों को घटनाक्रम की जानकारी होने के बाद पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
9 गवाह और 21 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए
मामले की जांच पूरी होने के बाद अनुसंधान अधिकारी महावीर प्रसाद ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाहों के बयान कराए गए तथा 21 दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
न्यायालय में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध लगाए गए अपराध प्रमाणित पाए गए। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध कर दिया।
पीड़िता की कम उम्र और अपराध की गंभीरता पर जोर
विशिष्ट न्यायालय पोक्सो नंबर-2 के न्यायाधीश भवानी शंकर पांडिया ने मामले में सजा सुनाते हुए पीड़िता की कम उम्र और अपराध के गंभीर प्रभाव को ध्यान में रखा। न्यायालय ने माना कि इतनी कम उम्र की बालिका के साथ किए गए अपराध का उसके मन और मस्तिष्क पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया। साथ ही पीड़िता को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से प्रतिकर योजना के तहत पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाए जाने के लिए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलवर को अनुशंसा की गई।
पोक्सो कानून के तहत सुनाया गया फैसला
मामले की सुनवाई विशिष्ट न्यायालय पोक्सो नंबर-2 में हुई। न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के परीक्षण और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया। कठोर सजा के साथ प्रतिकर की अनुशंसा से पीड़िता को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से राहत उपलब्ध कराने का रास्ता भी प्रशस्त हुआ है।
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