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    पंकज जैन : मूल्यों से नेतृत्व तक , एक वैश्विक उद्यमी की यात्रा

     

    वैश्विक डिजिटल परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति तक पहुँचना, किसी संयोग का परिणाम नहीं,यह आत्मअनुशासन, स्पष्ट दृष्टि और बार-बार स्वयं को गढ़ने के साहस की कहानी है

     

    राजेश रवि , मिशनसच न्यूज । पंकज जैन की जीवन-यात्रा उन विरल यात्राओं में से एक है, जहाँ सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मूल्यों से मापी जाती है। राजस्थान के एक साधारण जैन परिवार से निकलकर वैश्विक डिजिटल परिवर्तन की अग्रिम पंक्ति तक पहुँचना, किसी संयोग का परिणाम नहीं। यह आत्मअनुशासन, स्पष्ट दृष्टि और बार-बार स्वयं को गढ़ने के साहस की कहानी है।

    संस्कार, परिवार और प्रारंभिक चेतना

    10 अक्टूबर 1974 को अलवर ज़िले के बड़ौदाकान गाँव में जन्मे पंकज जैन का पालन-पोषण एक सिद्धांतनिष्ठ जैन परिवार में हुआ। उनके पिता भागचंद जैन, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर में कार्यरत थे। एक ऐसा दायित्व जिसने घर में अनुशासन, उत्तरदायित्व और स्थिरता का वातावरण बनाया। उनकी माता ने इस ढाँचे में सादगी, करुणा और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया।

    1979 में परिवार जयपुर आ गया। यहीं पंकज का शैक्षणिक और वैचारिक विस्तार प्रारंभ हुआ। श्री महावीर दिगंबर जैन स्कूल में शिक्षा के दौरान उन्होंने केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी अनुभव किया। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े होने के कारण, उनमें स्वाभाविक रूप से नेतृत्व और उत्तरदायित्व का भाव विकसित हुआ। उनकी बहन डॉ. शिखा जैन और छोटे भाई नीरज जैन। जो आगे चलकर अमेरिका के डैलस शहर में एक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट उद्यमी बने। उनके जीवन में संवाद, सहयोग और विश्वास के स्थायी स्तंभ रहे हैं।

    जैन शिविरों और माउंट आबू जैसे आध्यात्मिक परिवेश ने उनके भीतर संयम, अपरिग्रह और सेवा को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि बना दिया। यही मूल्य आगे चलकर उनके नेतृत्व की आत्मा बने।

    विरासत से आगे : आत्मनिर्भरता का बोध

    व्यवसायिक पृष्ठभूमि में जन्म लेने के कारण यह स्वाभाविक माना जाता था कि पंकज पारिवारिक व्यापार को आगे बढ़ाएँगे। किंतु जीवन ने उन्हें एक कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया। पारिवारिक व्यवसाय को एक समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। यह क्षण केवल वित्तीय चुनौती नहीं था। यह आत्ममंथन का क्षण था।

    यहीं पंकज ने गहराई से महसूस किया कि विरासत व्यक्ति को पहचान दे सकती है, किंतु दिशा नहीं। दिशा स्वयं खोजनी पड़ती है। इसी बोध ने उन्हें आत्मनिर्भरता, शिक्षा और भविष्य-केंद्रित कौशलों की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर किया।

    इंजीनियरिंग, अनुभव और दिशा का सत्य

    उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत BDCOE, वर्धा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक शिक्षा प्राप्त की। इंजीनियरिंग के वर्षों ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और समस्या-समाधान की सोच प्रदान की। उनकी पहली नौकरी औरंगाबाद स्थित Videocon कंपनी में लगी, जहाँ औद्योगिक अनुशासन और ज़मीनी कार्य-संस्कृति से उनका साक्षात्कार हुआ।

    इसी समय की एक साधारण-सी घटना उनके जीवन-दर्शन का स्थायी संदेश बन गई। एक यात्रा में वे आगरा जाने के उद्देश्य से ट्रेन में सवार हुए, नींद आ गई और सुबह आँख खुली तो वे दिल्ली पहुँच चुके थे। इस अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि केवल ईमानदार मेहनत पर्याप्त नहीं। यदि दिशा स्पष्ट न हो, तो वही मेहनत आपको मंज़िल से दूर भी ले जा सकती है।

    एक रात, जिसने भविष्य लिख दिया

    इसी कालखंड में, दिल्ली में मित्रों से मिलने के दौरान उनकी नज़र एक पुस्तक पर पड़ी—Let Us C (यशवंत कानिटकर)। उन्होंने सहज जिज्ञासा से पढ़ना शुरू किया, और वह जिज्ञासा पूरी रात चलती रही। सुबह तक वे पुस्तक का अधिकांश भाग पढ़ चुके थे। उस एक रात ने पंकज जैन के जीवन की दिशा तय कर दी। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर होते हुए भी उन्होंने स्पष्ट रूप से समझ लिया कि उनका भविष्य सॉफ़्टवेयर, कोडिंग और तकनीक की तार्किक दुनिया में है।

    आईटी में प्रवेश और वैश्विक क्षितिज

    इस नई समझ के साथ उन्होंने CDAC, पुणे में प्रवेश लिया। यहाँ उन्होंने कंप्यूटिंग, प्रोग्रामिंग और संरचित सोच की गहरी नींव रखी। इसके बाद मुंबई से उनके आईटी करियर की वास्तविक शुरुआत हुई, जहाँ उन्होंने क्लाइंट-ड्रिवन वातावरण, तीव्र डिलीवरी और उभरते भारतीय आईटी उद्योग को नज़दीक से देखा।आगे चलकर उनका पेशेवर जीवन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत हुआ। लगभग 11–12 वर्षों तक उन्होंने स्विट्ज़रलैंड, यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के विभिन्न देशों में कार्य किया। इन वर्षों ने उन्हें वैश्विक एंटरप्राइज़ सिस्टम्स, बहुसांस्कृतिक टीमों और बड़े डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रमों के बीच काम करने की परिपक्वता दी।

    इसी अवधि में उनका उद्यमी स्वभाव भी सक्रिय रहा। उन्होंने विभिन्न सेवा-आधारित और आईटी-संबंधित व्यवसायों की स्थापना और संचालन किया, जिससे उन्हें नेतृत्व, जोखिम प्रबंधन, लोगों की समझ और दीर्घकालिक दृष्टि का अमूल्य अनुभव प्राप्त हुआ। इस पूरे सफर में उनकी पत्नी रश्मि जैन का निरंतर और सशक्त सहयोग तथा उनके मार्गदर्शक जीजाजी धर्मेन्द्र जैन उनके जीवन का स्थायी आधार बना रहा। चाहे वह निर्णयों की कठिन घड़ियाँ हों या नए आरंभ की चुनौतियाँ।

    भारत वापसी : जड़ों की ओर लौटना

    2011 में, जब अधिकांश लोग विदेश में स्थायित्व चुनते हैं, पंकज जैन ने भारत लौटने का निर्णय लिया। यह निर्णय करियर से अधिक जीवन-मूल्यों से प्रेरित था। वे अपनी पत्नी रश्मि और बेटियों छवि तथा पूर्वी के साथ भारत लौटे, ताकि उनकी परवरिश भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के बीच हो।

    भारत लौटने के बाद उन्होंने एक स्टार्टअप की शुरुआत की, जो अपेक्षित व्यावसायिक सफलता प्राप्त नहीं कर पाया। किंतु पंकज ने इसे असफलता नहीं माना। जैन दर्शन के अनुरूप, उन्होंने परिणाम से अधिक अनुभव को महत्व दिया और यही अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पूँजी बना।

    Aaseya : परिणामों से पहचान बनाने वाली संस्था

    2017 में पंकज जैन ने Aaseya IT Services की स्थापना की। यह केवल एक कंपनी नहीं थी, बल्कि वर्षों की स्पष्टता, अनुभव और मूल्य-आधारित सोच का साकार रूप थी। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट थाAaseya आकार से नहीं, परिणामों से जानी जाएगी। आज Aaseya एक प्रतिष्ठित वैश्विक डिजिटल इंजीनियरिंग और ट्रांसफॉर्मेशन संगठन है। Aaseya में सीधे 600 से अधिक विशेषज्ञ कार्यरत हैं, जबकि समूह की अन्य कंपनियों सहित 9,500 से अधिक लोग विश्वभर में इस इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। Aaseya का वार्षिक कारोबार लगभग ₹400 करोड़ है, जो लगभग ₹3,500 करोड़ के समूह टर्नओवर का हिस्सा है। कंपनी 13 से अधिक देशों में कार्यरत है और इसके कार्यालय हैदराबाद, लंदन, एम्स्टर्डम, सिडनी, सिंगापुर, शिकागो, अबूधाबी, रियाद, पुणे, कोलकाता, बेंगलुरु और इंदौर में स्थित हैं। Aaseya को Pega Global Elite Partner का दुर्लभ सम्मान प्राप्त है और इसने सऊदी, यूके, यूएई और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों सहित अनेक वैश्विक संस्थाओं के लिए मिशन-क्रिटिकल समाधान प्रदान किए हैं।

    तकनीक, जिसका उद्देश्य समाधान है

    पंकज जैन के नेतृत्व में Aaseya तकनीक को उद्देश्य से जोड़ती है। यहाँ नवाचार का अर्थ केवल नवीन शब्दावली नहीं, बल्कि वास्तविक समस्याओं का समाधान है। कंपनी उन्नत डिजिटल इंजीनियरिंग, बुद्धिमान ऑटोमेशन और एआई-आधारित निर्णय प्रणालियों के माध्यम से स्मार्ट सिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर गवर्नेंस, औद्योगिक सुरक्षा और अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में भरोसेमंद समाधान प्रदान करती है।

    सम्मान, पहचान और नेतृत्व की परिपक्वता

    अपने मूल्य-आधारित नेतृत्व और वैश्विक प्रभाव के लिए पंकज जैन को Global Asian of the Year और CEO of the Year जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। उनकी प्रेरक यात्रा को Brands of Tomorrow – Season 3, Episode 17 के रूप में JioHotstar पर विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जहाँ एक साधारण पृष्ठभूमि से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर सजीव रूप में प्रस्तुत हुआ।

    परिवार और जीवन-दर्शन

    इन सभी उपलब्धियों के बीच, पंकज जैन आज भी पूरी तरह ज़मीन से जुड़े हुए हैं। उनकी पत्नी रश्मि, और उनकी बेटियाँ—छवि, जो Cardiff University, UK से पत्रकारिता में मास्टर्स कर रही हैं, तथा पूर्वी, जो King’s College London से विधि की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं । उनके लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी बहन डॉ. शिखा जैन और भाई नीरज जैन आज भी उनके सबसे भरोसेमंद मार्गदर्शकों में हैं। उनकी माता उर्मिला जैन एवं पिता ने इस क्षेत्र में सादगी, करुणा और आत्मसंयम जैसे संस्कारों का संचार किया।

    पंकज जैन का जीवन यह सिखाता है कि सच्ची सफलता वही है, जो मूल्यों के साथ अर्जित की जाए।
    दिशा बदली जा सकती है, नई शुरुआत की जा सकती है—यदि मन में स्पष्टता, साहस और संयम बना रहे।

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