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    भाग्य के भरोसे नहीं, कर्मयोगी बनकर आगे बढ़ें, संत महेशानंद सरस्वती ने दिया धर्म और ईमानदारी का संदेश

    प्रवचन में कर्मयोगी लोगों के साथ भगवान के होने की बात, संत बोले—सच्चाई से कमाएं और कमाई का अंश धर्म-सामाजिक कार्यों में लगाएं

    सोडावास। सोडावास के मुंडावर मार्ग स्थित सरस्वती भवन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में संत महेशानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को कर्म, धर्म, ईमानदारी और दान के महत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय निरंतर कर्म करते रहना चाहिए। जो व्यक्ति कर्मयोगी बनकर अपने कर्तव्य का पालन करता है, भगवान भी उसका साथ देते हैं।

    संत महेशानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि पितामह भीष्म ने बाणों की शैया पर लेटे हुए पांडवों को उपदेश देते हुए भाग्यवादी बनने से बचने और कर्मयोगी बनने की प्रेरणा दी थी। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने कर्मों से पीछे नहीं हटना चाहिए।

    ईमानदारी के रास्ते से करें धन अर्जित

    प्रवचन के दौरान संत ने कहा कि मनुष्य को अधिक से अधिक धन अर्जित करने का प्रयास करना चाहिए, लेकिन धन कमाने का रास्ता सच्चाई और ईमानदारी वाला होना चाहिए। गलत तरीके से अर्जित धन जीवन में वास्तविक सुख नहीं दे सकता।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी कमाई का एक अंश धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में खर्च करने का आह्वान किया। संत ने कहा कि समाज और जरूरतमंदों के लिए किया गया सहयोग व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    दान ऐसा हो कि दिखावा न हो

    संत महेशानंद सरस्वती महाराज ने दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उसके प्रदर्शन से बचने की सीख दी। उन्होंने कहा कि दान करते समय उसका प्रचार या प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दाएं हाथ से दान किया जाए तो बाएं हाथ को भी इसकी जानकारी नहीं होनी चाहिए। संत के अनुसार दान की वास्तविक भावना तभी बनी रहती है, जब उसमें दिखावे और प्रसिद्धि की इच्छा न हो।

    उन्होंने कहा कि अपने मुंह से किए गए दान का गुणगान करने के बजाय व्यक्ति को इसे सेवा की भावना से करना चाहिए। दान के पीछे यदि केवल प्रदर्शन की भावना हो तो उसकी वास्तविक महत्ता कम हो जाती है।

    राग और धर्म की भी की विस्तृत व्याख्या

    प्रवचन में संत ने राग और धर्म के विषय पर भी विस्तार से विचार रखे। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझने और जीवन में सद्भावना तथा अच्छे आचरण को अपनाने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने कहा कि धार्मिक जीवन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, विचार और कर्म में भी धर्म दिखाई देना चाहिए।

    युवाओं को अच्छे संकल्प लेने की प्रेरणा

    संत महेशानंद सरस्वती महाराज ने युवा पीढ़ी को विशेष संदेश देते हुए कहा कि युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ जीवन में अच्छे संकल्प लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे मन से लिया गया संकल्प व्यक्ति को अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाता है।

    उन्होंने युवाओं से अपने जीवन में अच्छे विचार, ईमानदारी और सेवा की भावना अपनाने का आह्वान किया। संत ने कहा कि यदि संकल्प सच्चे मन और सकारात्मक भावना से लिया जाए तो भगवान उसे पूरा करने में सहायता करते हैं।

    धार्मिक कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्र के युवा, श्रद्धालु और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुभाष भारत गुप्ता ने किया।

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