मिशनसच न्यूज, राजगढ़ (अलवर)। राजगढ़ पुलिस ने अपने कार्य से न केवल कानून-व्यवस्था की रक्षा की, बल्कि मानवता और सेवा की एक अनूठी मिसाल भी पेश की है। यह घटना उन सभी के लिए प्रेरणादायक है, जो पुलिस को केवल कानून लागू करने वाला तंत्र मानते हैं। राजगढ़ पुलिस ने दो मानसिक रूप से विक्षिप्त युवकों को न केवल संरक्षण प्रदान किया बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से उनके परिवारजनों की खोज कर उन्हें अपनों से मिलवाया।
राजगढ़ थाना प्रभारी राजेश मीना ने बताया कि कुछ दिन पूर्व सूचना प्राप्त हुई कि कस्बे में दो युवक संदिग्ध अवस्था में घूमते पाए गए हैं, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रहे थे। यह खबर मिलने पर पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए दोनों युवकों को अपने संरक्षण में लिया और उनकी पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास शुरू किया। चूंकि दोनों युवक स्पष्ट रूप से अपनी पहचान बताने की स्थिति में नहीं थे, ऐसे में पुलिस ने एक अलग राह अपनाई — सोशल मीडिया और स्थानीय नेटवर्क का सहारा लेकर व्यापक पहचान मुहिम शुरू की।
पुलिस की यह मुहिम रंग लाई और जल्द ही दोनों युवकों के परिवारों का पता चला। पहचान के अनुसार, एक युवक का नाम इब्राहिम पुत्र समसूदीन (उम्र 28 वर्ष) है, जो कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के डिठोरा मझोका गांव का रहने वाला है। वहीं दूसरा युवक कमलेश पुत्र नत्थूलाल कश्यप (उम्र 28 वर्ष), भकोड़ा कादरचौक, बदायूं (उत्तर प्रदेश) का निवासी है।
जब पुलिस द्वारा परिजनों को सूचना दी गई, तो वे तुरंत राजगढ़ पहुंचे। जैसे ही दोनों युवक अपने परिजनों से मिले, वहां उपस्थित सभी की आंखें नम हो गईं। परिवारजनों के चेहरों पर वर्षों बाद अपनों को पाने की खुशी साफ झलक रही थी। यह क्षण बेहद भावुक था, जिसे शब्दों में बयान करना कठिन है।
परिजनों ने राजगढ़ पुलिस, विशेषकर कोतवाल राजेश मीना और उनकी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की संवेदनशीलता और मानवीय पहल के चलते ही उन्हें अपने खोए हुए बेटे वापस मिल सके।
इस अवसर पर कोतवाल राजेश मीना ने आमजन से भी अपील की कि यदि किसी को कस्बे या आसपास के क्षेत्र में कोई मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति भटकता हुआ नजर आए, जो स्थानीय नहीं लगता हो, तो तुरंत इसकी सूचना नजदीकी थाने में दें। पुलिस इस जानकारी के आधार पर ऐसे लोगों को सुरक्षित स्थान और पहचान दिलवाने का प्रयास करेगी।
राजगढ़ पुलिस का यह कार्य पुलिस सेवा के मानवीय पहलू को उजागर करता है। यह उदाहरण साबित करता है कि यदि संवेदनशीलता, तकनीक और सामाजिक सहयोग एक साथ मिल जाए, तो असंभव भी संभव हो सकता है। मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को सहारा देना केवल सेवा नहीं, एक पुनीत कार्य है — जिसे राजगढ़ पुलिस ने पूर्ण समर्पण और ईमानदारी के साथ निभाया है।
यह घटना न केवल एक खबर है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है – कि जब व्यवस्था और मानवता साथ चलती हैं, तो वह किसी की ज़िंदगी बदल सकती है।