सजा के साथ जुर्माना भी लगाया, 2017 में 6 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए हुए थे ट्रैप
खैरथल। अलवर स्थित एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) कोर्ट ने खैरथल के जवाहर नवोदय विद्यालय के तत्कालीन उप प्राचार्य बासदेव वर्मा (बीडी वर्मा) को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कारावास तथा 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
एसीबी कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक जसवंत कुमार ने बताया कि खैरथल निवासी परिवादी जसवंत कुमार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी “प्रकाश स्वीट्स” नाम से फर्म थी और उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में मेस संचालन का ठेका लिया हुआ था।
रिश्वत नहीं देने पर बिल पास नहीं करने का आरोप
शिकायत के अनुसार मेस में कार्यरत हलवाइयों और हेल्परों के भुगतान से संबंधित बिलों को पास करने के लिए तत्कालीन उप प्राचार्य बासदेव वर्मा प्रति माह 3 हजार रुपये रिश्वत की मांग करते थे। आरोप था कि रिश्वत नहीं देने पर बिलों को लंबित रखा जाता था।
परिवादी के अनुसार अक्टूबर और नवंबर 2017 के बिलों को पास करने की एवज में आरोपी ने कुल 6 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
सत्यापन के बाद एसीबी ने की थी ट्रैप कार्रवाई
परिवादी की शिकायत पर एसीबी ने पहले रिश्वत मांग की सत्यापन प्रक्रिया पूरी की। शिकायत सही पाए जाने के बाद वर्ष 2017 में ट्रैप कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान एसीबी टीम ने तत्कालीन उप प्राचार्य बासदेव वर्मा को 6 हजार रुपये की रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार किया था। मामले की जांच और न्यायालय में सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
अदालत ने सुनाया फैसला
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद एसीबी कोर्ट ने आरोपी बासदेव वर्मा को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है, जिससे सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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